रायपुर , सितंबर 03 -- छत्तीसगढ़ ने जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान के तीसरे चरण (जेएसोबी 3.0) में देश में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य के सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले भी देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
विभाग द्वारा आज मिली जानकारी के अनुसार बीती रात नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल की जानकारी दी। 'कैच द रेन' सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों का ब्यौरा रखा।
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर जल संरक्षण को जनअभियान बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण वह खेती और ग्रामीण जीवन में पानी के महत्व को करीब से समझते हैं। इसी कारण राज्य की जल संरक्षण योजनाओं में किसान और गांव को केंद्र में रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले से शुरू हुए '5 प्रतिशत मॉडल' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस भूमि पर ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं एकत्र होकर जमीन में समाहित हो सके। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग और नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
'जल संचय जन भागीदारी' के प्रथम चरण 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं और राज्य देश में दूसरे स्थान पर रहा। वहीं जल संचय जन भागीदारी 2.0 में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 23 लाख 7 हजार 768 का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी राज्य दूसरे स्थान पर रहा।
वहीं 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 का कार्य पूर्ण हो चुका है।
राज्य में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के भी सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कैच द रेन - जहां जल गिरे, वहीं सहेजें' के संदेश को छत्तीसगढ़ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप धरातल पर उतार रहा है।
उन्होंने प्रत्येक राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, वर्षा, भू-जल स्थिति और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अलग 'कैच द रेन प्लान' तैयार करने का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए 'स्टेट वाटर अवार्ड्स' शुरू करने का भी सुझाव दिया।
उन्होंने जल संरचनाओं की मैपिंग मजबूत करने तथा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रत्येक तीन महीने में अभियान की समीक्षा करने का सुझाव दिया।
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