तिरुवनंतपुरम , जून 03 -- केरल सरकार ने राजधानी तिरुवनंतपुरम में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर रही लगातार जलभराव की समस्या से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाते हुए कई स्तरों पर कार्रवाई की योजना बनायी है।

जल संसाधन एवं आवास मंत्री मॉन्स जोसेफ की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में तत्काल हस्तक्षेप करने तथा समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं देवस्वम मंत्री के. मुरलीधरन तथा परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन भी शामिल हुए। बैठक में हालिया बाढ़ और जलभराव के कारणों की समीक्षा की गई तथा शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों की पहचान की गयी।

बैठक में पाया गया कि रेलवे द्वारा चलाए जा रहे निर्माण कार्यों के कारण पझवंगडी नहर की चौड़ाई कम हो गई है, जिससे चक्का और पझवंगडी सहित कई इलाकों में पानी जमा होने और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। मंत्रियों ने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान नहर की मूल चौड़ाई को बरकरार रखा जाना चाहिए था और इस संबंध में हुई कमियों ने वर्तमान स्थिति को जन्म दिया है।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि ईस्ट फोर्ट क्षेत्र में जलभराव अमायिझांचन नहर की सहायक दीवार को जमा कचरा और गाद हटाने के लिए तोड़े जाने के कारण हुआ। दीवार के पुनर्निर्माण से पहले ही भारी बारिश शुरू हो गई, जिससे नहर का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि अमायिझांचन नहर और पार्वती पुथनार में कचरा फेंके जाने से जल प्रवाह गंभीर रूप से बाधित हुआ। कचरा हटाने में हुई देरी के कारण स्थिति और खराब हो गई तथा कई इलाकों में जलभराव बढ़ गया।

अधिकारियों के अनुसार रेलवे के अधिकार क्षेत्र वाले क्षेत्रों सहित कुछ स्थानों से कचरा हटाने में स्थानीय स्वशासन विभाग को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि विधानसभा चुनाव के दौरान नगर निगम की रात्रिकालीन गश्त कम होने से नालों और नहरों में कचरा फेंकने की घटनाएं बढ़ गयी।

इसके अलावा नहरों के किनारे उगी पेड़ों की जड़ों ने सुरक्षा दीवारों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे जल निकासी तंत्र की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई है और जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई है। इन निष्कर्षों के मद्देनजर मंत्रियों ने अधिकारियों को बिना किसी विलंब के आपातकालीन उपाय लागू करने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को मुख्य सचिव के माध्यम से मंडल रेल प्रबंधक के साथ चर्चा शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि रेलवे निर्माण कार्यों और जल निकासी प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जा सके।

इस समिति में प्रमुख एवं लघु सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता, नगर निगम सचिव, स्थानीय स्वशासन विभाग के प्रधान निदेशक तथा केरल जल प्राधिकरण के संयुक्त प्रबंध निदेशक शामिल होंगे।

सरकार ने राजधानी की जल निकासी और नहर प्रणाली की सफाई, आधुनिकीकरण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने का भी निर्णय लिया है। मंत्रियों ने नगर निगम सहित सभी विभागों को इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से लेने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

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