बीड , अक्टूबर 20 -- मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने मंगलवार को समुदाय की आरक्षण संबंधी शिकायतों और अन्य मुद्दों को हल करने के लिए तीन पहलों की घोषणा की।

उन्होंने उन सरकारी अधिकारियों को चेतावनी दी जो जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने में देरी कर रहे हैं या ऐसा करने से इनकार कर रहे हैं। श्री पाटिल ने महाराष्ट्र के बीड जिले के नारायणगढ़ में वार्षिक दशहरा रैली में हजारों समर्थकों से कहा कि समुदाय पिछले तीन वर्षों से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है। उन्होंने मराठा युवाओं और बच्चों के भविष्य पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, "जब भी किसी राजनीतिक दल का कोई मराठा नेता मुश्किल में पड़ता है, तो समुदाय उसकी रक्षा के लिए आगे आता है। अगर समुदाय इन नेताओं का समर्थन करना बंद कर दे, तो उनमें से कई लोगों को जेल जाना पड़ सकता है। इसलिए समुदाय को मजबूत होना चाहिए और इसके बच्चों को तरक्की करनी चाहिए।"श्री पाटिल ने बताया कि ये तीन पहल मुख्य रूप से मराठा स्वयंसेवकों को जोड़ने, कुनबी रिकॉर्ड और आरक्षण प्रमाणपत्रों से जुड़ी शिकायतों को दूर करने और समुदाय के सदस्यों को अपनी अन्य समस्याएं उठाने के लिए एक मंच प्रदान करने पर केंद्रित होंगी।

पहली पहल के तहत 22 अक्टूबर को एक मोबाइल नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर लोग 'मराठा सेवक' (समुदाय के स्वयंसेवक) के रूप में पंजीकरण करा सकेंगे। विजयदशमी के बाद हर घर के लोग अपना नाम, गांव, पता और मोबाइल नंबर तय प्रक्रिया के जरिए भेजकर पंजीकरण करा सकेंगे। श्री पाटिल ने स्पष्ट किया कि आवेदकों को दिए गए नंबर पर कॉल करने की बजाय संदेश के जरिए अपनी जानकारी भेजनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य गांवों और घरों में स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क तैयार करना है, ताकि सामुदायिक संगठन को मजबूत किया जा सके और मराठा समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर सामूहिक रूप से कदम उठाए जा सकें।

दूसरी पहल कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए है। पात्र मराठा लोग अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ पाने के लिए इन प्रमाणपत्रों की मांग करते हैं।

श्री पाटिल ने आरोप लगाया कि जिन मामलों में कुनबी रिकॉर्ड मिल चुके हैं, वहां भी आवेदकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारी आवेदन लेने से इनकार कर रहे हैं, जबकि अन्य लोग जरूरी दस्तावेज मौजूद होने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने 'वैधता प्रमाणपत्र' प्राप्त करने में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र किया। आवेदकों को ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने और अपनी शिकायतों का विवरण देने की सुविधा देने के लिए एक अलग मोबाइल नंबर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हम पता लगाएंगे कि कौन से अधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने से मना कर रहे हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि इन शिकायतों के आधार पर उन अधिकारियों की पहचान की जाएगी जो इस प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं।

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