उदयपुर , अप्रैल 13 -- राजस्थान के दक्षिणी अरावली क्षेत्र में इंसान और तेंदुए के बीच संबंध, टकराव और सह अस्तित्व का अनोखा मिश्रण बनकर सामने आया है।

जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य के आसपास किये गये एक विस्तृत शोध में यह खुलासा हुआ है कि भारी आर्थिक नुकसान के बावजूद स्थानीय समुदायों में तेंदुए के प्रति सहनशीलता बनी हुई है।

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के प्राणी शास्त्र विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार कोली और उनके दल के कमल वैष्णव, निर्भय सिंह चौहान एवं उत्कर्ष प्रजापति द्वारा 2011 से 2024 के बीच किए गए इस अध्ययन में 572 मानव-तेंदुआ संघर्ष घटनाएं दर्ज की गयी, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत मामले पशुधन के शिकार से जुड़े थे।

श्री कोली ने बताया कि शोध के अनुसार तेंदुए के हमले मुख्य रूप से रात के समय होते हैं, जब पशु खुले या कच्चे बाड़ों में बंधे होते हैं। इनमें बकरियां, गाय और बछड़े सबसे ज्यादा शिकार बने। शोध में पाया गया है कि ऊंचाई वाले और अभयारण्य के पास स्थित गांवों में खतरा सबसे अधिक पाया गया, जहां मानव बस्तियां औरवन क्षेत्र एक-दूसरे से सटे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि अध्ययन में मुआवजा प्रणाली की बड़ी खामियां भी उजागर हुईं। घटनाओं में से केवल 31 प्रतिशत मामलों में ही मुआवजे के लिए दावा किया गया। इसी प्रकार स्वीकृत राशि वास्तविक नुकसान से काफी कम रही वहीं जटिल कागजी प्रक्रिया और कम जागरूकता प्रमुख बाधाएं रहीं। इससे ग्रामीणों में आर्थिक दबाव तो बढ़ा, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इससे तेंदुए के प्रति हिंसक प्रतिक्रिया नहीं दिखी।

शोध की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि तेंदुए के खिलाफ बदले में हत्या का कोई मामला सामने नहीं आया। स्थानीय लोगों का दृष्टिकोण लगभग तटस्थ (-0.2 स्कोर) पाया गया, जो बताता है कि सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि अधिक शिक्षित लोग तेंदुए के प्रति अधिक सकारात्मक सोच रखते हैं जबकि कम आय और कम शिक्षा वाले परिवारों में डर और नकारात्मकता अधिक है। शिक्षा, सहअस्तित्व की सबसे मजबूत कुंजी बनकर उभर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार संघर्ष के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। इसके तहत जंगल और गांवों के बीच बढ़ती नजदीकी, खुले और असुरक्षित पशु बाड़े, भूमि उपयोग में बदलाव, अभयारण्य के आसपास मानव गतिविधियां आदि तेंदुआ और मानव संर्घ के प्रमुख कारण पाये गये हैं।

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