रांची , अगस्त 26 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने डुमरी विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच हुई कथित हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन की ओर से सामने आए बयानों पर सवाल उठाए हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि भाषा, शिष्टाचार और मर्यादा हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन यह मर्यादा केवल जनप्रतिनिधियों पर लागू नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कथित तौर पर गाली-गलौज करने वाले दारोगा के व्यवहार की निंदा की? क्या आम लोगों से गाली-गलौज या अभद्र भाषा में बात करने वाले पुलिसकर्मियों को कभी नसीहत दी गई? उन्होंने कहा कि थानों में आम जनता के साथ अभद्र व्यवहार, फोन पर गाली-गलौज और दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं।

श्री मरांडी ने बिना सहमति किसी की बातचीत रिकॉर्ड कर उसे वायरल किए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। मरांडी ने कहा कि यह भी विचार करने की जरूरत है कि निजता के अधिकार और उससे जुड़े कानून क्या केवल आम लोगों के लिए हैं या पुलिस पर भी समान रूप से लागू होते हैं।

उन्होंने कुछ महीने पहले बोकारो जिले के चास थाना प्रभारी का कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल होने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सरकार से मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया।

श्री मरांडी ने कहा कि अगर आम जनता द्वारा किसी को गाली देना अपराध है, तो पुलिस को ऐसा कौन-सा विशेषाधिकार मिला है कि वह जनता के साथ अपशब्दों का इस्तेमाल करे। उन्होंने सवाल किया कि यह विशेषाधिकार आखिर किसने दिया है।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और पुलिस के बीच ऐसी स्थिति पैदा होना केवल एक व्यक्ति या एक घटना का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे राज्य सरकार की नीति और संरक्षण भी जिम्मेदार है। पुलिस को सबसे पहले जनता से बातचीत करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा।

श्री मरांडी ने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज कराना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि तभी पुलिस व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव होगा।

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