बैतूल , जून 21 -- मध्यप्रदेश के बैतूल में नौकरी की तलाश में लंबे समय तक भटकने के बाद मुलताई तहसील के डहुआ पंखा निवासी जयप्रकाश चिकाने ने हार मानने के बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना और केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर 'दूध गंगा डेयरी' की स्थापना की,जो आज क्षेत्र में रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम बन गई है।
जयप्रकाश चिकाने ने बताया कि योजना के तहत आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्हें बैंक से 27 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ जिसमें 10 लाख रुपये का अनुदान भी शामिल है। इस वित्तीय सहायता से उन्होंने आधुनिक डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। वर्तमान में उनकी डेयरी आसपास के 15 से 20 गांवों से प्रतिदिन लगभग चार हजार लीटर दूध का संग्रहण कर रही है।
उन्होंने बताया कि डेयरी में दूध से दही, घी, मक्खन, पनीर, खोवा और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का निर्माण किया जाता है। इन उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजार और दुकानों के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा नर्मदापुरम स्थित एक निजी कंपनी को भी नियमित रूप से दूध की आपूर्ति की जा रही है। जयप्रकाश के अनुसार सभी खर्चों का वहन करने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 40 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
दूध गंगा डेयरी केवल एक सफल व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का भी केंद्र बन गई है। डेयरी में करीब 20 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यहां कार्यरत देवेन्द्र पोटफोड़े पिछले तीन वर्षों से डेयरी से जुड़े हुए हैं। उन्हें प्रतिमाह 12 हजार रुपये का मानदेय प्राप्त होता है।
देवेन्द्र ने बताया कि डेयरी में काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नौकरी के साथ-साथ वे अपनी खेती और घरेलू जिम्मेदारियों का भी निर्वहन कर लेते हैं। उनका कार्य समय सुबह छह बजे से दस बजे तक और शाम छह बजे से रात नौ बजे तक रहता है। शेष समय वे खेती और अन्य कार्यों में लगाते हैं। उनका कहना है कि निजी कंपनियों में पूर्णकालिक नौकरी के मुकाबले यह व्यवस्था अधिक सुविधाजनक और लाभकारी है।
जयप्रकाश चिकाने ने अपनी सफलता का श्रेय पीएमएफएमई योजना को देते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि योजनाओं का लाभ लेकर गांवों में भी रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
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