जयपुर , सितंबर 22 -- इंडियन एकेडमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी एंड हेड नेक सर्जरी की 12वीं राष्ट्रीय कांफ्रेस 24 से 27 सितंबर तक जयपुर में आयोजित की जाएगी।

जयपुर एसएमएस अस्पताल के कान, नाक, गला रोग विभाग के वरिष्ठ आचार्य और सम्मेलन के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. पवन सिंघल ने मंगलवार को यहां प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी देते हुए बताया कि इसमें देश-विदेश के कान, नाक, गला रोग विशेषज्ञ, हेड एंड नेक सर्जन, मेडिकल कॉलेजों, एम्स, आईआईटी, बिट्स पिलानी से जुड़े विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में देश विदेश के करीब 800 प्रतिनिधि शरीक होंगे।

डॉ. सिंघल ने बताया कि इसमें नवाचार, नए अनुसंधान और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर जोर रहेगा ताकि मरीजों की जांच, शल्य चिकित्सा और उपचार को अधिक सुगम, सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में नए विकल्पों पर चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का विशेष जोर युवा चिकित्सकों, पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों, नए चिकित्सकों और मेडिकल कॉलेजों में नए शिक्षकों के ज्ञानवर्धन पर रहेगा, ताकि उन्हें नए रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक उपचार विधियों से परिचित कराया जा सके।

उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस की शुरुआत 24 सितंबर को एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक में प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप से होगी। जिसमें मृत शरीर के विच्छेदन एवं अध्ययन कार्यशाला में देश-विदेश में ख्याति प्राप्त सर्जन डॉ. सतीश जैन एंडोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी का प्रदर्शन करेंगे। इसमें नाक की एंडोस्कोपिक सर्जरी और ब्रेन की एंडोस्कोपिक सर्जरी की विधियां कैडेवर पर प्रदर्शित की जाएंगी।

इसके बाद विश्वविख्यात खोपड़ी के आधार के शल्य चिकित्सक डॉ. संपत चंद प्रसाद राव लेटरल स्कल बेस सर्जरी की तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे। हेड एंड नेक सर्जरी के तहत थायरॉइड, पैरोटिड और कैंसर सर्जरी से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण भी कैडेवर के माध्यम से दिया जाएगा। डॉ. सिंघल ने बताया कि 24 सितंबर को ही चक्कर आने की समस्या पर पूरे दिन न्यूरो-ओटोलॉजी वर्कशॉप होगी। इसमें देशभर में विख्यात डॉ.अनिर्बान बिश्वास और डॉ.अनीता भंडारी चक्कर के कारणों, जांच और उपचार की नवीनतम विधियों की जानकारी देंगे। प्रतिभागियों को मशीनों पर हैंड्स-ऑन अभ्यास भी कराया जाएगा, ताकि वे इन तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

कॉन्फ्रेंस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर भी विशेष सत्र रखा गया है। इस सत्र में विद्यार्थियों को लैपटॉप, वेबसाइट और सॉफ्टवेयर के माध्यम से एआई के उपयोग की जानकारी देंगे। इसमें मरीजों के लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान, जांच और उपचार की प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने में एआई के संभावित इस्तेमाल पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डॉ. सिंघल ने बताया कि सम्मेलन में पहली बार किसी ईएनटी सम्मेलन में रोबोटिक सर्जरी का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके लिए द विंची रोबोट मंगाया गया है। बैंगलुरु और दिल्ली से आने वाली टीमें विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को रोबोटिक सर्जरी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग देंगी। प्रशिक्षण के लिए मानव शरीर जैसी संरचना वाले प्लास्टिक 3डी मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होने बताया कि भारत में किसी ईएनटी कॉन्फ्रेंस में इस तरह का आयोजन पहली बार होगा जिसका प्रमुख आकर्षण 'नवाचार' या नवाचार आधारित प्रतियोगिता के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें मरीजों की चिकित्सा और उन्हें बेहतर सुविधा देने से जुड़ी समस्याओं को प्रॉब्लम स्टेटमेंट के रूप में दिया जाएगा।

चार सदस्यों की टीम में एक मेडिकल अंडर ग्रेजुएट, एक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थी, एक इंजीनियरिंग विद्यार्थी और एक टेक्निकल टीम का सदस्य शामिल होगा। टीमों को समस्या का समाधान खोजने के लिए तीन दिन दिए जाएंगे। इसके बाद रविवार को प्रत्येक टीम को तीन मिनट में अपना समाधान और नया इनोवेशन प्रस्तुत करना होगा। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रथम पुरस्कार एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 30 हजार रुपये तथा अन्य पुरस्कारों के रूप में 20 हजार और 10 हजार रुपये दिए जाने की योजना है।

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