जयपुर , सितंबर 24 -- इंडियन एकेडेमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी और हेड-नेक सर्जरी (आईएओएचएनएस) की 12वीं कॉन्फ्रेंस का गुरुवार को यहां हैंड्स-ऑन रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण के साथ आगाज हुआ।
सवाई मानसिंह अस्पताल के एकेडमिक भवन में शुरु हुए 24 से 27 सितंबर तक आयोजित ईएनटी सम्मेलन की प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में चिकित्सकों और विद्यार्थियों को रोबोटिक सर्जरी समेत कई आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
वर्कशॉप में डॉ.सतीश जैन और डॉ.संपत चंद प्रसाद राव ने एंटीरियर स्कल बेस और लेटरल स्कल बेस की सर्जिकल तकनीकों का कैडेवर पर प्रदर्शन किया। इसके साथ ही चिकित्सकों ने नर्व मॉनिटरिंग सिस्टम का भी हैंड्स-ऑन अभ्यास किया। इस वर्कशॉप में करीब 150 विद्यार्थियों और लगभग 50 कंसल्टेंट्स ने हिस्सा लिया और इसे सफल बताया गया।
प्री-कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में यूस्टेशियन ट्यूब के अंदर होने वाले विकारों के उपचार के लिए बलून से उसे फुलाने की तकनीक, लेजर विधियों और 3डी सीटी स्केन एवं सीबीसीटी स्केन का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा एलर्जी की जांच के लिए स्किन प्रिक टेस्ट और चक्कर आने की समस्या से संबंधित जांच एवं उपचार पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
एसएमएस अस्पताल के कान, नाक, गला रोग विभाग के वरिष्ठ आचार्य और कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ.पवन सिंघल ने बताया कि ईएनटी और सिर-गर्दन से जुड़ी कॉन्फ्रेंस में रोबोट की मौजूदगी अभी भी दुर्लभ है।
उन्होंने कहा कि देश में कान-नाक-गला रोग तथा सिर, मुख और गले से जुड़े रोगों में रोबोटिक सर्जरी का प्रचलन विदेशों की तुलना में अभी उतना नहीं है। डॉ. सिंघल के अनुसार करीब एक हजार थायरॉयड ऑपरेशन होने की स्थिति में वर्तमान समय में संभवतः केवल एक थायरॉयड ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी से किया जाता है।
डॉ. सिंघल ने रोबोटिक सर्जरी की उपयोगिता समझाते हुए बताया कि सामान्य सर्जरी में नंगी आंखों और अपने हाथों से काम करते समय कुछ सीमाएं सामने आती हैं, खासकर शरीर के कोनों तक पहुंचने, वहां जाने और उपकरणों को घुमाने में।
उन्होंने बताया कि रोबोट में चार आर्म्स होती हैं, जिनमें एक में कैमरा होता है। अलग-अलग आर्म्स के जरिए पकड़ने, काटने और कोगुलेट करने जैसे कार्य किए जा सकते हैं। कैमरे की मदद से किसी विशेष क्षेत्र को जरूरत के अनुसार बड़ा या छोटा करके देखा जा सकता है और उसे अलग-अलग एंगल पर घुमाया जा सकता है। इससे सर्जन को देखने की क्षमता में सहायता मिलती है।
डॉ. सिंघल ने रोबोटिक सर्जरी में डेक्सटेरिटी यानी हाथ और इंस्ट्रूमेंट्स की सूक्ष्म कार्यक्षमता को भी महत्वपूर्ण बताया। मानव हाथ का रोटेशन 270 डिग्री से अधिक नहीं हो पाता, जबकि रोबोटिक आर्म को 360 डिग्री तक और आठ अलग-अलग तरीकों से घुमाया जा सकता है। उन्होंने मानव हाथ की तुलना में रोबोटिक आर्म की मूवमेंट क्षमता को अलग बताया।
उन्होंने कहा कि मैनुअल सर्जरी में मानवीय त्रुटि या हाथों में हल्का कंपन यानी ट्रेमर हो सकता है। संवेदनशील क्षेत्रों, बड़ी रक्त धमनियों या नसों के आसपास सर्जरी के दौरान यह चुनौती बन सकती है। इसके विपरीत, उनके अनुसार रोबोटिक सिस्टम में डॉक्टर कंसोल से जो कमांड देता है, उसे बिना हाथ के कंपन के अंजाम दिया जाता है।
डॉ. सिंघल ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी में जटिलताएं कम होने, विजिबिलिटी बेहतर होने और परिणाम अच्छे मिलने की संभावनाओं को इसके प्रमुख फायदों में गिना जाता है। उन्होंने मूवमेंट को भी एक महत्वपूर्ण फायदा बताया, क्योंकि रोबोटिक सिस्टम के जरिए संरचनाओं को अलग-अलग कोणों से देखा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने रोबोटिक सर्जरी की दो प्रमुख चुनौतियों के रूप में सीमित उपलब्धता और अधिक लागत का भी जिक्र किया।
डॉ. सिंघल के अनुसार लागत की चुनौती को एक ही संस्थान में एक रोबोट को कई विभागों द्वारा साझा इस्तेमाल में लाकर कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल या संस्थान में रोबोटिक सिस्टम उपलब्ध है, तो यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी, ईएनटी सहित ऐसे अन्य विभाग जहां रोबोटिक सर्जरी संभव है, उसका उपयोग कर सकते हैं।
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