जयपुर , फरवरी 13 -- राजस्थान के जयपुर में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के अधीन राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा में शुक्रवार को "किसान सारथी 2.0" संवेदीकरण एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि बाजरा प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है तथा बरानी क्षेत्रों में किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। प्रो चौहान ने बताया कि बाजरे की उत्पादकता बढ़ाने में कृषि विज्ञान केंद्र सराहनीय कार्य कर रहे हैं और अब "किसान सारथी 2.0" पोर्टल के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीकी जानकारी घर बैठे उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे समय पर अपनी समस्याओं का समाधान कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराना कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी जिम्मेदारी होगी। तभी इस डिजिटल पहल की सार्थकता सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की अनेक योजनाओं की जानकारी के अभाव में किसान लाभ नहीं ले पाते हैं, ऐसे में यह पोर्टल उस अंतर को भरने में सहायक सिद्ध होगा।

कृषि में एआई एप्लीकेशन के उपयोग पर उन्होंने सावधानी बरतने और वैज्ञानिक कसौटी पर परखकर अपनाने की आवश्यकता बताई, ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिले और वे पूरी तरह तकनीक पर निर्भर भी न हों।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के के चतुर्वेदी ने "किसान सारथी 2.0" पोर्टल की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पोर्टल 13 भाषाओं में कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा। वर्तमान में यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में संचालित है।

कृषि तकनीकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-द्वितीय जोधपुर के निदेशक डॉ. जे.पी. मिश्रा ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों से किसानों तक अधिकतम जानकारी पहुंचाने के लिए नवीन डिजिटल तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों से किसानों को त्वरित एवं प्रभावी सलाह प्रदान की जा सकती है।

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