मुंबई , अप्रैल 09 -- जयपुर-मुंबई ट्रेन गोलीकांड के एक पीड़ित की विधवा ने सत्र अदालत में याचिका दायर कर बर्खास्त आरपीएफ कांस्टेबल चेतन सिंह चौधरी को ताजा मूल्यांकन के लिए ठाणे मानसिक अस्पताल भेजने के आदेश को रद्द करने की मांग की है। यह घटना जुलाई 2023 में हुई थी।

मृतक असगर अली अब्बास शेख की विधवा ने अपनी याचिका में कहा कि जिला मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड द्वारा चौधरी का व्यापक मानसिक परीक्षण किया जा चुका है, जिसमें उसे मानसिक रूप से स्थिर और मुकदमे का सामना करने योग्य पाया गया है।

याचिका में कहा गया, "यह रिपोर्ट 24 मार्च 2025 को इस माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। अतः नए सिरे से मानसिक परीक्षण के लिए भेजने का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है।"इसमें यह भी कहा गया कि चौधरी फरवरी से जुलाई 2025 तक ठाणे के क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल में भर्ती रहा और उपचार पूरा करने के बाद उसकी मानसिक स्थिति स्थिर घोषित की गयी।

याचिका में कहा गया, "निर्धारित उपचार पूरा करने के बाद पुनः इस पर विचार करना पूरी तरह अनावश्यक है और यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।"आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि कई प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपी के एक विशेष समुदाय के प्रति कट्टर सांप्रदायिक घृणा की पुष्टि की है और एक वायरल वीडियो भी उसके उद्देश्य को प्रमाणित करता है। इसमें कहा गया कि यह घटना अचानक पागलपन का परिणाम नहीं बल्कि पूर्वनियोजित धार्मिक दुर्भावना का मामला है।

उल्लेखनीय है कि 31 जुलाई 2023 को आरोपी चौधरी ने महाराष्ट्र के पालघर रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन में चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिनमें उसके वरिष्ठ सहयोगी आरपीएफ सहायक उपनिरीक्षक टीकाराम मीणा भी शामिल थे।

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