जयपुर , मार्च 31 -- राजस्थान में जयपुर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी को राजस्थानी भाषा में लिखे उनके चर्चित कहानी संग्रह "भरखमा" के लिए देश के प्रतिष्ठित साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह पुरस्कार केन्द्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन साहित्य अकादेमी द्वारा प्रतिवर्ष 24 भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए प्रदान किया जाता है और इसे देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में गिना जाता है। नई दिल्ली स्थित रवींद्र भवन के कमानी सभागार में आयोजित भव्य समारोह में साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने डॉ. सोनी को एक लाख रुपये का चेक, स्मृति चिह्न एवं शॉल प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर श्री कौशिक ने कहा कि विविध भारतीय भाषाओं में पुरस्कार प्रदान करने से भारतीय साहित्य की एकात्म भावना सशक्त रूप से सामने आती है। उन्होंने कहा कि सम्मानित सभी साहित्यकार देश की 24 भाषाओं की समृद्ध साहित्यिक परंपरा के प्रतिनिधि हैं और अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को समृद्ध करने का कार्य कर रहे हैं। यह आयोजन एक प्रकार से उस ऋषि ऋण को उतारने का प्रयास है, जिसे कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि संस्थान ही निभा सकता है।

डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी एक कुशल प्रशासक होने के साथ संवेदनशील और प्रतिबद्ध साहित्यकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। प्रशासनिक दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने साहित्य सृजन की अपनी साधना को निरंतर जारी रखा है। उनकी लेखनी में समाज, लोकजीवन, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन यथार्थ का सशक्त एवं प्रभावी चित्रण देखने को मिलता है। राजस्थानी और हिन्दी दोनों भाषाओं में सक्रिय डॉ. सोनी कहानी, कविता, डायरी लेखन तथा अनुवाद के क्षेत्र में निरंतर सृजनरत हैं और अब तक उनकी 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

उनकी चर्चित कृति "भरखमा" राजस्थानी साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं में शुमार है, जिसकी कहानियां ग्रामीण परिवेश, मानवीय रिश्तों, जीवन संघर्ष और सांस्कृतिक मूल्यों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती हैं। इस कृति की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी पर आधारित राजस्थानी फिल्म "भरखमा" का निर्माण भी किया जा चुका है, जिसने क्षेत्रीय साहित्य और सिनेमा दोनों को नई पहचान दी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित