जयपुर , अक्टूबर 20 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस विजयादशमी के अवसर पर जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में विजयादशमी उत्सव पूर्ण उत्साह एवं अनुशासन के साथ सम्पन्न हुआ।
इन कार्यक्रमों में हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में सहभागिता किया। विभिन्न बस्तियों में शस्त्र पूजन, पथ संचलन एवं शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें समाजबंधुओं, मातृशक्ति एवं विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने भी सहभागिता की।
जयपुर महानगर के विभिन्न नगरों एवं बस्तियों से शहर के अलग-अलग मार्गों एवं प्रमुख स्थानों से पथ संचलन निकाले गए। गालव नगर, पॉन्ड्रिक नगर, झोटवाड़ा, करधनी नगर, विद्याधर, मानसरोवर, जगतपुरा, पत्रकार कॉलोनी आदि जगहों पर स्वयंसेवकों ने घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अनुशासन, सामूहिकता एवं पूर्ण एकात्मता का परिचय दिया। एक लय, एक गति और एक दिशा में आगे बढ़ते स्वयंसेवकों के संचलन में संगठन की एकजुटता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। विभिन्न मार्गों पर समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा कर संचलन का स्वागत किया।
विभिन्न उत्सव स्थलों पर शस्त्र पूजन के साथ शारीरिक प्रधान कार्यक्रम आयोजित हुए। इनमें स्वयंसेवकों ने दंड, योग, आसन एवं अन्य शारीरिक कौशलों का प्रदर्शन किया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से शारीरिक दक्षता, अनुशासन, सामूहिक समन्वय और संगठन भावना का परिचय दिया गया।
विजयादशमी उत्सव के अवसर पर आयोजित बौद्धिक सत्रों में विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्य, संगठित समाज की आवश्यकता तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने विजयादशमी को शक्ति-उपासना, शस्त्र-पूजन एवं विजय का पर्व बताते हुए इसे दैवी शक्तियों की आसुरी प्रवृत्तियों पर विजय का प्रतीक बताया।
करधनी नगर के विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने भाग लिया और डॉ अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि विजयादशमी के सांस्कृतिक महत्त्व, संगठन की भूमिका तथा समाजजीवन में एकता, समरसता एवं राष्ट्रभाव को सुदृढ़ करने के विषय को प्रमुखता दी।
जयपुर महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में अनेक पदाधिकारियों एवं वक्ताओं ने स्वयंसेवकों और समाजबंधुओं का मार्गदर्शन किया।
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