श्रीनगर , सितंबर 24 -- जम्मू कश्मीर विधानसभा ने 31 अक्टूबर, 2019 से पहले नियुक्त सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने का प्रस्ताव गुरुवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

गौरतलब है कि तमिलनाडु के बाद जम्मू कश्मीर दूसरा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश बन गया है जिसने विधानसभा में सरकारी शिक्षकों को अपनी नौकरी बनाये रखने के लिए अनिवार्य टीईटी पास करने से छूट देने का प्रस्ताव अपनाया है। यह प्रस्ताव मंगलवार को जम्मू-कश्मीर की स्कूल शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने सदन में पेश किया था। गुरुवार को सर्वसम्मति से पारित होने से पहले इस पर चर्चा हुई।

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि वह 'बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार' (आरटीई) कानून, 2009 की धारा 23 में जरूरी कानूनी संशोधन करे, ताकि 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी देने से छूट मिल सके। इसमें केंद्र सरकार से यह भी कहा गया कि वह प्रस्तावित छूट देने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठायें जायें और 'राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद' (एनसीटीई) के जरिए जरूरी अधिसूचना जारी की जाये।

सुश्री इटू ने सदन में बोलते हुए प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए सदस्यों का धन्यवाद किया और कहा कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के विधायकों ने ध्यान दिया है। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि पूरा सदन चाहे इस तरफ हो या उस तरफ, इस बात पर सहमत है कि यह प्रस्ताव पारित होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले ही निर्देश दे चुका है कि देश भर के शिक्षकों को टीईटी देना चाहिए।

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