जम्मू , अगस्त 12 -- म्मू-कश्मीर में आगामी सात से दस सितंबर तक पहली बार चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (डीआईपीआर) ने इस महोत्सव की परिकल्पना की है। यह महोत्सव न केवल जम्मू-कश्मीर के लोगों तक अंतरराष्ट्रीय सिनेमा को पहुंचाएगा, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को फिल्म उद्योग की दिग्गज हस्तियों के साथ संवाद करने, अपना कौशल निखारने और पेशेवर नेटवर्क बनाने का शानदार अवसर भी प्रदान करेगा।
जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे स्थानीय प्रतिभाओं और सिनेमा से जुड़े व्यापक समुदाय के लिए एक मील का पत्थर करार दिया है।
साल 2014 में अपनी डोगरी फिल्म 'गीतियां' की रिलीज के बाद सुर्खियों में आये जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध निर्देशक राहुल शर्मा ने यूनीवार्ता से कहा कि जम्मू-कश्मीर का पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफजेके) एक अद्भुत पहल है। उन्होंने कहा, "सिनेमा में दिलों और दिमाग को जीतने की एक अनूठी क्षमता है, जो हमारी संस्कृति, जिजीविषा और कहानियों का एक जीवंत दस्तावेज है। इस स्तर के आयोजन अंतरराष्ट्रीय मंच पर जम्मू-कश्मीर की समृद्ध प्रतिभा को निश्चित रूप से उजागर करेंगे। मैं उन सभी विभागों और हितधारकों को बधाई देता हूं जो इस सपने को साकार कर रहे हैं।"जम्मू-कश्मीर के थिएटर और बड़े पर्दे की एक और चर्चित हस्ती कुसुम टिकू ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की मेजबानी करना सरकार का एक स्वागत योग्य कदम है। यह हमारे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को अपना कौशल दिखाने का अवसर देता है, बल्कि दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञों के साथ सहयोग और नेटवर्किंग के रास्ते भी खोलता है।"जम्मू-कश्मीर के मशहूर कलाकार पंकज खजूरिया ने बताया कि 1947 में आजादी के बाद जब से भारत में फिल्में बननी शुरू हुईं, तब से शायद ही कोई ऐसा फिल्म निर्माता रहा हो जो इस बात से अनजान हो कि जम्मू-कश्मीर, खासकर कश्मीर, हमेशा से फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा स्थलों में से एक रहा है। उन्होंने कहा कि 1990 तक यहाँ कई फिल्मों की शूटिंग हुई और कई फिल्मों की कहानियां कश्मीर पर आधारित रहीं। रामानंद सागर और वेद राही जैसे जम्मू के फिल्म निर्माताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद से और भी अधिक फिल्म निर्माता जम्मू-कश्मीर का रुख कर रहे हैं। यह महोत्सव भारतीय सिनेमा को बढ़ावा देगा और स्थानीय प्रतिभाओं के साथ-साथ पर्यटन उद्योग को भी बड़ा उछाल देगा।
जम्मू के फिल्म निर्माता और उद्यमी अतुल विनोद दुग्गल ने भी इस कदम को गेम-चेंजर बताया। 'शिकारा', 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा', 'द स्काई इज पिंक' और '12वीं फेल' जैसी कई बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्मों से जुड़े श्री दुग्गल ने उम्मीद जतायी कि यह आयोजन हर साल आयोजित किया जायेगा।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के सिलसिले में जम्मू में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना निदेशक श्रेया सिंघल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दशकों से फिल्मों से गहराई से जुड़ा रहा है। दुनिया भर के लोगों के लिए जम्मू-कश्मीर की पहचान अक्सर सिनेमा के जरिए ही पहुंची है, इसलिए अब यहां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव होना पूरी तरह उपयुक्त है।
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