जम्मू , सितंबर 21 -- नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एनएचएआई) के परियोजपा निदेशक राजीव कुमार ने सोमवार को बताया कि नेशनल हाईवे-44 एक अहम कनेक्टिविटी कॉरिडोर है और इसे चार-लेन का बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है तथा अगले साल अलग-अलग राजमार्ग परियोजनाओं पर छह सुरंगें बनकर तैयार हो जायेंगी, जिससे इस इलाके में हर मौसम में कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

भोपाल में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (सीबीसी) के उप निदेशक शारिक नूर की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू में एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय का दौरा किया और इलाके में हाईवे से जुड़े अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मौके पर जाकर जायजा लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में भोपाल के मीडिया संगठनों के सीनियर प्रतिनिधि शामिल थे।

भोपाल के 10 पत्रकारों के मीडिया प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर में चल रहे बड़े हाईवे और सुरंग प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी देते हुए श्री कुमार ने बताया कि हाईवे कॉरिडोर पर सुरंगों के इस्तेमाल से श्रीनगर की सड़क दूरी लगभग 45 किलोमीटर कम हो गयी है और यात्रा के समय में एक घंटे से ज्यादा की बचत होती है। पहले यह सड़क दूरी लगभग 300 किलोमीटर थी।

प्रतिनिधिमंडल ने चेनानी-नाशरी सुरंग का भी दौरा किया और इसके निर्माण, संचालन और यात्रा के समय को कम करने तथा जम्मू-श्रीनगर हाईवे कॉरिडोर की विश्वसनीयता को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी ली।

अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया कि जोजिला सुरंग के दिसंबर 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इस परियोजना का उद्देश्य कश्मीर घाटी तथा लद्दाख के बीच बेहतर और ज्यादा भरोसेमंद कनेक्टिविटी देना है। प्रस्तावित कटरा-कुलगाम सड़क परियोजनाओं की अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। एक बार बन जाने के बाद, इस कॉरिडोर से जम्मू की तरफ से कश्मीर घाटी के लिए सबसे छोटा सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।

प्रतिनिधिमंडल को जम्मू-कश्मीर में एनएचएआई परियोजनाओं की कुल प्रगति के बारे में भी जानकारी दी गयी। कुल 382 किलोमीटर लंबे 22 प्रोजेक्ट 14,819 करोड़ रूपये की लागत से पूरे किये गये हैं, जबकि 320 किलोमीटर के 16 प्रोजेक्ट 22,277 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से अभी चल रहे हैं।

इससे पहले मीडिया का एक दल मीडिया सेंटर बिल्डिंग के दौरे के दौरान पीआईबी जम्मू की निदेशक नेहा जलाली से मिला।

बातचीत के दौरान सुश्री जलाली ने आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थकेयर, एंटरप्रेन्योरशिप और आर्थिक अवसरों के क्षेत्रों में हो रहे अहम विकास कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और अपग्रेडेशन के बारे में बात की, जिसमें बड़े हाईवे, पुल और टनल नेटवर्क का विकास शामिल है। उन्होंने हेल्थकेयर सेक्टर में हुए विकास, खासकर एम्स जम्मू की स्थापना और विस्तार पर भी जोर दिया।

उन्होंने इस क्षेत्र में बेहतर हेल्थकेयर सुविधाओं को मज़बूत करने और लोगों को स्पेशलाइज़्ड मेडिकल सेवाओं और आधुनिक हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तक बेहतर पहुँच दिलाने में इस संस्थान की अहमियत का ज़िक्र किया। उभरते आर्थिक अवसरों के बारे में बात करते हुए उन्होंने 'अरोमा मिशन' और एरोमैटिक (सुगंधित) व उससे जुड़े सेक्टरों में खेती, वैल्यू एडिशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

सुश्री जलाली ने जम्मू-कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और विरासत के बारे में भी बात की और इस क्षेत्र की अलग-अलग परंपराओं, भाषाओं, त्योहारों, हस्तशिल्प, कला और खान-पान की विशेषताओं को रेखांकित किया।

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