श्रीनगर , जून 27 -- जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियासत कर्ण सिंह ने शनिवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कराने के लिए "भीख नहीं मांगनी चाहिये", क्योंकि केंद्र सरकार पहले ही इसकी बहाली का वादा कर चुकी है।
राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद और इंटर-फेथ हार्मनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित अंतरधार्मिक संवाद कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से बातचीत में सिंह ने कहा, "मैं तत्कालीन राज्य का प्रमुख था। उस समय केंद्र शासित प्रदेश जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। यह एक पूर्ण राज्य था।"उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल किये जाने के महत्व के बारे में पूछे जाने पर कहा, "मेरा मानना है कि राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिये। सरकार भी कह चुकी है कि वह इसे बहाल करेगी। हम देश का सबसे बड़ा राज्य थे। हमें इसके लिए भीख नहीं मांगनी चाहिए। उन्हें यह देना ही होगा। वे इसे कब देते हैं, यह उन पर निर्भर करता है। हम उन्हें मजबूर नहीं कर सकते।"उल्लेखनीय है कि कर्ण सिंह ने राज्य के प्रमुख के रूप में वर्ष 1957 में जम्मू-कश्मीर के संविधान पर हस्ताक्षर किये थे। श्री सिंह ने शांति और एकता की अपील करते हुए जम्मू-कश्मीर के लोगों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने तथा जम्मू एवं कश्मीर क्षेत्रों के बीच संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "मेरा संदेश है कि सौहार्द बनाए रखें। जम्मू और कश्मीर के बीच जो संबंध कभी-कभी नाजुक हो जाते हैं, उन्हें मजबूत बनाये रखना चाहिये, ताकि हमारा राज्य प्रगति करे, पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करे और देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करे।"श्री सिंह ने कहा कि अंतरधार्मिक संवाद भारत की एकता बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसे जम्मू-कश्मीर में भी बढ़ावा दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
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