श्रीनगर , मई 11 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश के दूरसंचार क्षेत्र में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की शक्तियां बढ़ाने के केंद्र सरकार के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि उप राज्यपाल को इस तरह का अधिकार देने में कुछ भी गलत नहीं है, जबकि जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने इस कदम को लोकतांत्रिक शासन में 'एक और सेंध' करार दिया।
कांग्रेस ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ 2024 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था और केंद्र शासित प्रदेश में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं।
केंद्र ने एक प्रमुख प्रशासनिक कदम उठाते हुए हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अंतर्गत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया, जिससे दूरसंचार प्रशासन एवंनियामक मामलों में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की भूमिका का विस्तार हुआ।
श्री अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को दूरसंचार अधिकार देने में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि फोन टैपिंग, मोबाइल सेवाओं के निलंबन और इंटरनेट शटडाउन से संबंधित फैसले गृह विभाग से जुड़े हैं।
श्री उमर ने कहा, "उनके पास दूरसंचार की शक्ति होनी चाहिए। ऐसा कुछ भी नहीं है जो पुनर्गठन अधिनियम या व्यावसायिक नियमों के खिलाफ हो।"उन्होंने कहा कि संचार में रुकावट या इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने जैसी कार्रवाइयां केवल गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति में होती हैं और गृह विभाग के माध्यम से जारी की जाती हैं, जो उपराज्यप के अधीन कार्य करता है।
उन्होंने कहा, "टेलीफोन टैप करना, मोबाइल सेवा बंद करना या इंटरनेट बंद करना ये आदेश गृह विभाग से आते हैं। गृह, कानून-व्यवस्था, सुरक्षा उपराज्यपाल की जिम्मेदारी है।"मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर चुनी हुई सरकार सुरक्षा मामलों पर नियंत्रण के बिना ऐसे फैसलों में शामिल होगी तो इससे प्रशासनिक जटिलताएं उत्पन्न होंगी। श्री अब्दुल्ला ने कहा, "अगर स्थिति बिगड़ती है और मोबाइल इंटरनेट बंद करना पड़ता है तो उपराज्यपाल की ओर से आदेश जारी किया जाएगा। जब तक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल के पास है तब तक उनके पास शक्ति होनी चाहिए।"एक दिन पहले, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख और विधायक तारिक कर्रा ने कहा, "जम्मू-कश्मीर के गैर निर्वाचित शक्ति को इंटरनेट शटडाउन, अवरोधन, संचार नेटवर्क और डिक्रिप्शन प्राधिकरण को अवरुद्ध करने सहित व्यापक दूरसंचार शक्तियां सौंपने का निर्णय जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार के लोकतांत्रिक शासन तंत्र में एक और सेंध है।"श्री कर्रा ने कहा कि वर्षों से जम्मू-कश्मीर में विश्वास की बहाली, लोकतांत्रिक सशक्तिकरण एवं संस्थानों को मजबूत करने के वादे किये गये लेकिन इस तरह के कदम केवल इस भावना को मजबूत करते हैं कि एक निर्वाचित व्यवस्था के बावजूद वास्तविक प्राधिकार कहीं और केंद्रित है।
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