जम्मू , मई 26 -- जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में अपनी हरी-भरी वादियों के लिए मशहूर खूबसूरत भद्रवाह घाटी छह और सात जून को दो दिवसीय लैवेंडर महोत्सव की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।

गौरतलब है कि हिमालय की तलहटी में बसा भद्रवाह अपनी समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ भारत की 'बैंगनी क्रांति' (लैवेंडर की खेती) के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद - भारतीय समेकित औषधि संस्थान (सीएसआईआर-आईआईआईएम) जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने कहा, "इस साल छह से सात जून तक होने वाले लैवेंडर महोत्सव की मेजबानी के लिए मंच सज चुका है।"श्री अहमद ने कहा कि भद्रवाह के राजकीय डिग्री कॉलेज में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ इत्र के कारोबार से जुड़े प्रमुख हस्तियां, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक इसकी शोभा बढ़ाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने पिछले साल लैवेंडर महोत्सव का उद्घाटन करते हुए लैवेंडर खेती को कृषि के एक नये मॉडल के रूप में सराहना की थी, जिसने दूर-दराज के और पहाड़ी इलाकों में उद्यमिता की कहानी को फिर से लिखा है। उन्होंने कहा था कि लैवेंडर ने जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के छोटे से शहर भद्रवाह को एक राष्ट्रीय पहचान दी है और भारत की विकास गाथा में एक राष्ट्रीय भूमिका भी निभायी है।

इस बीच, निदेशक ने बताया कि छह जून को डॉ. सिंह प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे, जिसके बाद वह समारोह को संबोधित करेंगे। साथ ही समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और नए उद्यमियों व किसानों को सम्मानित भी किया जाएगा। जबकि सात जून को लैवेंडर के खेतों का दौरा आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद अर्क निकालने की प्रक्रिया का सीधा प्रदर्शन, तकनीकी सत्र, खरीददार-विक्रेता बैठक और अंत में समापन समारोह होगा।

डॉ. अहमद ने कहा, "हम लोगों से लैवेंडर की इस खेती का जश्न मनाने का आग्रह करते हैं, जिसने इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदल दिया है और यहाँ के किसानों को सशक्त बनाया है।" उन्होंने बताया कि सीएसआईआर-आईआईआईएम भारत की बैंगनी क्रांति में सबसे आगे रहा है, जिसने लैवेंडर की खेती को किसानों के लिए एक स्थायी आजीविका मॉडल में बदलने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

निदेशक ने कहा, "संस्थान ने लैवेंडर की एक उन्नत किस्म, आरआरएल-12 विकसित की है। साथ ही विशेष रूप से पहाड़ी और बारिश पर निर्भर क्षेत्रों के लिए उन्नत कृषि-तकनीक तैयार की है, जिससे जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में लैवेंडर की खेती को व्यावहारिक बनाया जा सके।"डॉ. अहमद ने खुलासा किया, "फसल की कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और किसानों को बेहतर लाभ सुनिश्चित करने के लिए, विभिन्न स्थानों पर 80 से अधिक अर्क इकाइयाँ (तेल निकालने की मशीनें) स्थापित की गई हैं, जिससे किसान स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाला लैवेंडर का तेल निकाल सकें।" उन्होंने कहा कि इस एकीकृत दृष्टिकोण ने किसानों को केवल खेती करने से आगे बढ़कर मूल्य वर्धित उत्पाद विकसित करने में सक्षम बनाया है। बैंगनी क्रांति टिकाऊ कृषि परिवर्तन और ग्रामीण उद्यमिता का एक मजबूत राष्ट्रीय मॉडल बन गई है।

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