श्रीनगर , जून 01 -- जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में नशा विरोधी रैली का नेतृत्व करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान अब जनआंदोलन बन चुका है और इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाना है।

रैली को प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी से अलग हुए जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट (जेडीएफ) का भी समर्थन मिला।

श्री सिन्हा ने कहा कि अभिभावक, शिक्षक, धार्मिक नेता और युवा स्वयंसेवक प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस अभियान में जुटे हैं। नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल जनस्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी है। नशीले पदार्थों पर खर्च होने वाला धन आतंकवादी नेटवर्क को मजबूत करता है और नशे की तस्करी पर रोक लगाकर आतंक की वित्तीय आपूर्ति को कमजोर किया जा सकता है।

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में शुरू किए गए 'नशामुक्त भारत अभियान' ने जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 51 दिनों में नशा तस्करों और नार्को-आतंकियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की गई है।

उन्होंने बताया कि इस अवधि में 923 प्राथमिकी दर्ज की गयीं, एक हजार से अधिक तस्करों और नशा कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया, 55 से अधिक लोगों को पीआईटी-एनडीपीएस के तहत हिरासत में लिया गया, 668 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए गए और 124 पासपोर्ट निरस्त करने की सिफारिश की गयी।

श्री सिन्हा ने कहा कि प्रशासन केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की आपूर्ति श्रृंखला तोड़ने, जनजागरूकता बढ़ाने और नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर भी काम कर रहा है, ताकि युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।

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