जम्मू , सितंबर 20 -- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने 15 दिसंबर 2024 को हुए जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन (जेकेओए) के चुनाव को शून्य और अमान्य घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने जेकेओए के प्रशासन और प्रबंधन की निगरानी के लिए दो सदस्यीय प्रशासकों की समिति (सीओए) का गठन भी किया है।

इस संबंध में श्री राजीव शर्मा की ओर से अधिवक्ता अमित गुप्ता, अधिवक्ता गौरव सदोत्रा और अधिवक्ता सुमित मोजा ने याचिका दायर की थी। मामले में केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों की ओर से डीएसजीआई विशाल शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता एम.के. भारद्वाज के साथ गगन कोहली, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव शर्मा के साथ अजय वैद, अधिवक्ता अंशुजा टाक और अधिवक्ता विकास मागोत्रा ने पक्ष रखा। न्यायमूर्ति राहुल भारती ने 19 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की जम्मू पीठ में इस मामले में फैसला सुनाया।

डब्ल्यूपी (सी) संख्या 103/2025 मामले में अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया, इसके बाद पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति तथा विवादित चुनाव प्रक्रिया देश के राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (एनएसडीसीआई) के प्रावधानों के खिलाफ थी। अदालत ने इन सभी को शून्य और अमान्य घोषित कर दिया।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन के प्रशासन और प्रबंधन की निगरानी के लिए दो सदस्यीय प्रशासकों की समिति गठित की है। समिति में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश चैन लाल बावारिया और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह भाऊ को शामिल किया गया है।

समिति को एनएसडीसीआई, 2011 और भारतीय ओलंपिक संघ के संविधान के अनुसार जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन के संविधान में संशोधन और उसे अद्यतन करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही संबद्ध राज्य खेल संघों को भी अपने ढांचे और संविधान को लागू नियमों के अनुरूप करने को सुनिश्चित करने को कहा गया है।

समिति को संशोधित संविधान के तहत पदाधिकारियों और कार्यकारिणी समिति के लिए नये, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने तथा 29 जनवरी 2027 या उससे पहले उच्च न्यायालय के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन और दुष्यंत शर्मा को संगठन के सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज तुरंत प्रशासकों की समिति को सौंपने का भी निर्देश दिया। याचिकाकर्ता राजीव शर्मा ने जेकेओए की चुनाव प्रक्रिया और परिणामों को चुनौती दी थी। इस चुनाव में प्रतिवादी संख्या छह से 18 तक को पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित घोषित किया गया था।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा दुष्यंत शर्मा की चुनाव लड़ने की पात्रता से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि वह सरकारी कर्मचारी हैं और अपने नियोक्ता से अनिवार्य पूर्व अनुमति लिए बिना लगातार तीसरी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़े थे।

उच्च न्यायालय ने जेकेओए द्वारा राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (एनएसडीसीआई), 2011 के पालन की भी जांच की। उच्चतम न्यायालय के अखिल भारतीय फुटबॉल संघ बनाम राहुल मेहरा मामले सहित अन्य फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि खेल संस्थाएं सार्वजनिक कार्य करती हैं और उन्हें पारदर्शिता, जवाबदेही, ईमानदारी तथा संस्थागत दक्षता बनाए रखना जरूरी है।

अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में गंभीर कमियां पाईं। उसने निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति और चुनाव कराने के तरीके को ऐसी 'दिखावटी प्रक्रिया' बताया, जिसका उद्देश्य कार्यकारी पदों पर एकाधिकार बनाए रखना था।

जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सभी संबद्ध राज्य खेल संघों को प्रशासकों की समिति के साथ पूरा सहयोग करने और उसके निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। इस फैसले से 15 दिसंबर 2024 को हुआ चुनाव प्रभावी रूप से रद्द हो गया है और आवश्यक संवैधानिक सुधार तथा नए चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन का प्रशासन प्रशासकों की समिति के अधीन रहेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित