जम्मू , अक्टूबर 04 -- जम्मू-कश्मीर में अनिश्चितकालीन मोर्चे के चौथे दिन संपूर्ण जम्मू क्षेत्र में विरोध रैलियां निकाले जाने के साथ ही पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग का अभियान और तेज हो गया।

जम्मू के सैनिक कॉलोनी में एक विरोध रैली निकाली गयी, जहां सिख समुदाय के लोगों ने पंजाबी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग उठायी। जम्मू के विजयपुर, कठुआ और अन्य इलाकों में भी इसी तरह की रैलियां आयोजित की गयी, जिससे इस अभियान का जनाधार और व्यापक हो गया है।

आयोजकों ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों से लोगों की बढ़ती भागीदारी जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति को मान्यता, संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए सिख संगत के बढ़ते संकल्प को दर्शाती है।

डिगियाना स्थित गुरुद्वारा रानी तालाब के अध्यक्ष तरनजीत सिंह टोनी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मंत्रिपरिषद और सभी 90 विधायकों से इस मांग का समर्थन करने और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव पारित कराने की एक बार फिर अपील की।

श्री टोनी ने इस मांग के समर्थन में सभी जनप्रतिनिधियों से लिखित पत्र देने का आग्रह करते हुए जोर दिया कि यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की भाषाई, साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है।

उन्होंने दोहराया कि सिख संगत शांतिपूर्ण, संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से इस मामले को आगे बढ़ा रही है।

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