जम्मू , सितंबर 30 -- संस्कृति और समृद्ध विरासत की भूमि तथा ऐतिहासिक रूप से 'विश्वासस्थली' के नाम से प्रसिद्ध जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले का दर्शनीय शहर बसोहली आगामी 19 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय 'बसोहली उत्सव' के चौथे संस्करण में सांस्कृतिक मूल्यों और कलात्मक धरोहर के अनूठे संगम को प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जम्मू के सांस्कृतिक परिदृश्य की आत्मा माना जाने वाला यह उत्सव बसोहली शहर में आयोजित किया जाएगा, जो पूरे जम्मू क्षेत्र में भाईचारे और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है। ऐतिहासिक तहसील बसोहली उधमपुर और डोडा जिलों को जोड़ती है तथा पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल प्रदेश के साथ अपनी सीमाएं साझा करती है। आगामी 19 से 21 अक्टूबर तक चलने वाला 'बसोहली उत्सव 4.0' रामायण की परंपराओं पर केंद्रित होगा, जिसमें थीम-आधारित प्रदर्शनियां, पुस्तिकाओं का विमोचन, लोक कलाएं, नृत्य व गायन प्रतियोगिताएं, स्थानीय खेल और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल होंगी।

वार्षिक बसोहली उत्सव का आयोजन करने वाले 'विश्वासस्थली फाउंडेशन' के संस्थापक शक्ति पाठक ने यूनीवार्ता को बताया कि यह उत्सव बसोहली की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का एक जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि बसोहली शहर घर के उस 'ड्राइंग रूम' की तरह है जो संस्कृति और परंपराओं के विभिन्न रंगों को प्रदर्शित करता है। यद्यपि बसोहली कठुआ जिले का हिस्सा है, लेकिन उधमपुर और डोडा क्षेत्रों से इसका जुड़ाव इसकी पहचान को और समृद्ध बनाता है। यह किसी विशेष क्षेत्र का त्यौहार नहीं है, बल्कि संस्कृति और रीति-रिवाजों के रूप में पूरे जम्मू संभाग का प्रतिनिधित्व करता है।

श्री पाठक ने आगे बताया कि बसोहली शहर जीआई-टैग प्राप्त पहाड़ी लघु चित्रों (बसोहली शैली), विश्व प्रसिद्ध पश्मीना, पारंपरिक रामलीला और हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है। ये परंपराएं न केवल सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने बताया कि इस उत्सव में स्थानीय लोगों की भारी भागीदारी है, जिनके निस्वार्थ योगदान से यह आयोजन हर साल नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार ने कहा कि जम्मू क्षेत्र विभिन्न भाषाओं, लोक परंपराओं, खान-पान और अनकही कहानियों को एक साथ लाता है, और बसोहली उत्सव विविधताओं के संदेश के साथ इन सभी को एक मंच प्रदान करता है।

गत वर्ष उत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस आयोजन को 'कला, संस्कृति और परंपरा का महाकुंभ' करार दिया था। उन्होंने कहा था कि यह उत्सव 'ब्रांड बसोहली' को देश के कोने-कोने और विदेशों तक बढ़ावा देने तथा विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग्स और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच प्रदान करने का एक बेहतरीन अवसर है। उपराज्यपाल ने कहा था कि बसोहली केवल इतिहास की किताबों का हिस्सा नहीं है, बल्कि कला, साहित्य और परंपरा से जुड़े साधकों का ऊर्जा क्षेत्र है।

आयोजन समिति के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता शिव कुमार पाधा ने बताया कि शक्ति पाठक के व्यक्तिगत प्रयासों के कारण यह उत्सव पूरे देश में लोकप्रियता हासिल कर रहा है और विभिन्न सरकारी विभाग इसे सफल बनाने के लिए पूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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