पटना , अप्रैल 23 -- बिहार के जमुई जिले में स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ियां में हजारों साल पुराने शैल चित्र (रॉक पेंटिंग) मिलने के बाद राज्य सरकार इसके संरक्षण की दिशा में सक्रिय हो गई है। गिद्धेश्वर पहाड़ियों के शैलाश्रयों (रॉक शेल्टर) में बहुत पुराने समय के शैल चित्र 2022 के आसपास खोजे गए थे।ये चित्र नवपाषाण काल से लेकर प्रारंभिक इतिहास काल के माने जा रहे हैं। इस खोज का सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग जमुई वन विभाग की टीम ने की है ।बिहार सरकार इन शैल चित्रों का संरक्षण करेगी। इसके साथ ही इनका प्रयोग रिसर्च के लिए भी किया जाएगा।
वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने बताया कि जल्द ही इन चित्रों के संरक्षण का काम शुरू किया जाएगा।
गौरतलब है कि प्रागैतिहासिक काल वह समय था, जब लिखित इतिहास मौजूद नहीं था। इस दौरान लोग पत्थर के औजारों का उपयोग करते थे। नवपाषाण काल लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व तक का माना जाता है। इसी समय इंसानों ने खेती करना, पशुपालन करना और एक जगह बसकर रहना शुरू किया। उस दौर के लोग अपने जीवन और आसपास के वातावरण को शैल चित्रों के माध्यम से व्यक्त करते थे। सर्वेक्षण के दौरान गिद्धेश्वर पहाड़ियों में कई जगहों पर ऐसे मानव निर्मित शैल चित्र मिले हैं। इन चित्रों में इंसानों की गतिविधियों और जंगली जानवरों को दर्शाया गया है। ये चित्र इस बात का प्रमाण हैं कि इस क्षेत्र में बहुत पहले से मानव सभ्यता विकसित थी और यहां की सांस्कृतिक विरासत काफी समृद्ध रही है। इस खोज को सुरक्षित रखने और इसे बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर को देख सकें।
इस सर्वेक्षण का नेतृत्व वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने किया है । उनके साथ मिथिलेश कुमार, दीपु रविदास और धीरेंद्र कुमार सहित अन्य टीम के सदस्यों ने भी योगदान दिया।
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