जालौन , सितंबर 7 -- उत्तर प्रदेश के जालौन में सोमवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती मनाली चन्द्रा ने जिला कारागार उरई का साप्ताहिक भ्रमण एवं विधिक शिविर आयोजित किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उन बंदियों की सूची तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय भेजने के निर्देश दिए, जिनकी जमानत सक्षम न्यायालय से मंजूर हो चुकी है, लेकिन जमानतगीर उपलब्ध नहीं होने के कारण वे रिहा नहीं हो पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे बंदियों की प्रभावी पैरवी कर उन्हें शीघ्र रिहाई दिलाने का प्रयास किया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों की जमानत राज्य की ओर से जिला अधिकार प्राप्त समिति जालौन के माध्यम से कराने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बंदियों की मुकदमों में पैरवी, विधिक सहायता एवं सलाह की स्थिति की जानकारी ली।

सचिव ने निर्देश दिए कि जिस बंदी के पास निजी अधिवक्ता नहीं है अथवा न्यायालय में प्रभावी पैरवी नहीं हो पा रही है, उसे नियमानुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। महिला बंदियों तथा उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा, खान-पान आदि व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। मुलाकाती क्षेत्र में स्थापित लीगल एड हेल्प डेस्क का निरीक्षण कर उसकी कार्यप्रणाली देखी गई। बंदियों ने किसी प्रकार की समस्या नहीं बताई।

इसके बाद बंदियों एवं वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया गया। असिस्टेंट प्रथम एलएडीसी अभिषेक ने संविधान के अनुच्छेद 39ए के तहत गरीब एवं कमजोर वर्गों को मुफ्त विधिक सहायता तथा अनुच्छेद 14 और 22(1) के तहत समानता एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने प्ली बार्गेनिंग की अवधारणा और इसके लाभों के बारे में भी बताया।

इस अवसर पर कारापाल प्रदीप कुमार, चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल बर्मन, उपकारापाल अमर सिंह व सुखवती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक शुभम् शुक्ला मौजूद रहे।

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