हल्द्वानी , जुलाई 29 -- उत्तराखंड में हल्द्वानी के मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के निर्माण कार्यों में धीमी प्रगति और मलबा निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताई है।

निरीक्षण में सामने आया कि मलबा निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइट चिह्नित होने के बावजूद वर्तमान में केवल एक साइट का उपयोग किया जा रहा है और वहां भी वैज्ञानिक तरीके से मलबे का निस्तारण नहीं हो रहा है। बारिश के दौरान नदी किनारे डाला गया मलबा नदी में बह रहा है। वहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार-पांच माह से साइट का निरीक्षण नहीं कर रही है। सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों को सभी कमियों को दूर करते हुए परियोजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर बुधवार को सीडीओ ने जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान मलबा निस्तारण, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक दायित्व से जुड़े कार्यों की स्थिति भी जानी गई।

मलबा निस्तारण की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए तीन डंपिंग साइट चयनित की गई हैं, लेकिन अभी केवल एक साइट का इस्तेमाल हो रहा है। सीडीओ ने अन्य दोनों साइटों को भी जल्द विकसित करने और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मलबे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत करीब 408 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि करीब 68 करोड़ रुपये का मुआवजा अभी वितरित किया जाना बाकी है, जबकि लगभग 12 करोड़ रुपये से जुड़े 14 परिवारों के मामले आर्बिट्रेशन में लंबित हैं। सीडीओ ने लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को समय पर राहत देने को कहा।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा पिछले चार-पांच माह से निरीक्षण नहीं किए जाने पर भी सीडीओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में नियमित गुणवत्ता निरीक्षण कराने के निर्देश दिए।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि परियोजना में मैनपावर और मशीनरी निर्धारित क्षमता से कम होने के कारण प्रगति प्रभावित हो रही है और परियोजना वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों से पीछे चल रही है। सीडीओ ने संसाधनों में वृद्धि कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

बैठक में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए पराग फार्म में विकसित की जा रही कॉलोनी की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सीडीओ ने कॉलोनी में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा।

वहीं, कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी (सीईआर) के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित 19 गांवों में 1,175 सोलर लाइटें लगाने की योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने पिछले वर्ष लगाई गई सोलर लाइटों का एसडीएम और पीओ उरेडा की संयुक्त समिति से भौतिक सत्यापन कराने तथा नई सोलर लाइटों की खरीद जिला प्रशासन की निगरानी में कराने के निर्देश दिए गए।

सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, शौचालय और स्मार्ट क्लास सहित अन्य विकास कार्यों के लिए पांच वर्ष के लिए निर्धारित 13 करोड़ रुपये में से अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च होने पर सीडीओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने वर्षवार बजट का स्पष्ट विभाजन कर प्रभावित गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार करने और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत, जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी डॉ. मुकेश नेगी, यूयूएसडीए के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार सहित परियोजना से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। परियोजना के महाप्रबंधक के मौके पर उपस्थित नहीं होने पर भी सीडीओ ने नाराजगी जताई।

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