भोपाल/छतरपुर , मई 15 -- जन संघर्ष समन्वय समिति (जेएसएसएस) मध्यप्रदेश ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित जबरन बेदखली की कड़ी निंदा की है।
समिति ने जारी बयान में आरोप लगाया कि ढोढन, पलकौहा, कूपी और आसपास के गांवों में प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जबरन हटाने, मकान तोड़ने तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की कार्रवाई की जा रही है। समिति ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
जेएसएसएस के अनुसार ग्रामीण अपने घरों और जमीनों को बचाने के लिए विरोध कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने संवाद के बजाय पुलिस बल का प्रयोग किया। बयान में दावा किया गया कि कई मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया तथा क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि 13 मई को किशनगढ़ थाने में आंदोलन से जुड़े अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत सहित लगभग 150 लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास, षड्यंत्र और बलवा जैसी धाराओं में "फर्जी" प्रकरण दर्ज किए गए। समिति ने केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड क्षेत्र के संसाधनों के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे "पारिस्थितिकीय आपदा" करार दिया।
जेएसएसएस ने मांग की कि बेदखली और मकान तोड़ने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए और दर्ज प्रकरण निरस्त किए जाएं। साथ ही विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, जमीन के बदले जमीन तथा सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। समिति ने पुलिस कार्रवाई की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
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