नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- लोकसभा में बुधवार को एक हजार से अधिक कानूनों का सरलीकरण करने और छोटे-मोटे मामलों में अदालती चक्कर से लोगों को बचाने के प्रावधान वाला जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इससे पहले कांग्रेस की के काव्या के विधेयक में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जन विश्वास विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप जनता पर विश्वास बढ़ाने के लिए कानूनों का सरलीकरण करने के वास्ते यह विधेयक लायी है।
श्री गोयल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जनता पर विश्वास की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाये। इस कानून के लागू होने से अनेक मामलों में छोटी-मोटी गलतियों पर चेतावनी देना, फिर वही गलती करने पर दंड देना और फिर गलती करने पर अदालतों के चक्कर लगाने के प्रावधान किये गये हैं। पिछली सरकारों ने सामान्य व्यक्ति की तकलीफों को ध्यान रखे बिना कानून बनाये थे। इस विधेयक का मतलब लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा कि लोगों पर विश्वास बढ़ाने के प्रयास के तहत ही मोदी सरकार ने आते ही स्व-प्रमाणीकरण शुरू किया था। अब अनेक मामलों में शपथपत्र देने के बजाय स्व-प्रमाणीकरण से ही काम हो जाते हैं। आयकर विवरणी दाखिल करने के कार्य का भी सरलीकरण किया गया, इससे अब आयकर दाताओं को उनका रिटर्न दाखिल करने में बहुत सहूलियत हो रही है और लोगों का धन भी बहुत जल्द उनके खातों में पहुंच जाता है। लाभार्थियों को सीधे उनके खातों में धन हस्तांतरण से दलालों और बिचौलियों से मुक्ति दिलायी गयी। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से पश्चिम एशिया में युद्ध संकट के बावजूद मार्च में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक वस्तु एवं सेवा कर संग्रह किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से एक हजार से अधिक छोटे-मोटे मामलों में अदालती चक्करों से लोगों को मुक्ति दिलायी गयी है। प्रवर समिति ने इस विधेयक पर गहन अध्ययन किया और बड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिये, और सभी सुझावों को शामिल किया गया है। एक हजार से अधिक कानूनों को सरल किया है। इससे कामगारों और छोटे दुकानदारों को बहुत लाभ होगा। इससे मछुआरों को भी बहुत लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक से सबको सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन जीने का अवसर मिले, यही मोदी सरकार की मानसिकता है।
श्री गोयल ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति गलत दवाई बनाता है, गलत दवाई मांगता है, तो उसके लिए प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस कानून में नियमों को सिर्फ सरल किया गया है। इसमें व्यवस्था है कि छोटे-मोटे दवा विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय, जो बनाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई हो, ताकि जड़ से समस्या को निर्मूल किया जा सके। यह कानून छोटी-मोटी गलतियों से निजात दिलाने का काम करता है। महिलाएं जो हस्तशिल्प से जुड़ी हुई हैं, जो छोटे-मोटे काम करके अपने परिवार को चला रही हैं, उनको इस विधेयक के जरिए राहत देने और सुरक्षा प्रदान करने का काम हुआ है।
उन्होंने कहा कि चाय बागान में काम करने वाले कामगारों के लिए कानून को सरल बनाया गया है। पश्चिम बंगाल और असम के चाय बागान को लाभ पहुंचने का काम हुआ है और नारियल रेशा बोर्ड कारोबार को इससे फायदा होगा। इस कानून के सरल बनाने से छोटे-मोटे कारोबारी और निर्यातकों को लाभ होगा। छोटे दुकानदार तथा रहरी पटरी पर काम करने वालों को भी इस कानून के बनने से फायदा होगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित