नयी दिल्ली , जुलाई 10 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने प्रदेश सरकार के जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से संबंधित अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ज्ञापन सौंपा है।

डॉ. नरेश कुमार ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि नयी अधिसूचना के तहत अब किसी अचल संपत्ति की जीपीए थर्ड पार्टी के नाम कराने से पहले फाइल को कलेक्टर ऑफ स्टैंप के पास भेजना होगा। अधिसूचना में भले ही 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि इससे भ्रष्टाचार की एक नयी खिड़की खुल जाएगी। महीनों और वर्षों तक फाइलें लंबित रहेंगी तथा आम नागरिक को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार को वास्तव में स्टाम्प शुल्क चोरी रोकनी है, तो उसे इस गड़बड़ी में शामिल माफियाओं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसके बजाय सरकार ने दिल्ली की भोली-भाली जनता को परेशान करने का रास्ता चुना है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार खुद के फैसलों को लेकर भ्रम की स्थिति में दिखाई देती है। एक तरफ सरकार कहती है कि रजिस्ट्री कराने के लिए अब अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की आवश्यकता नहीं है, वहीं दूसरी तरफ जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी कराने के लिए लोगों को कलेक्टर ऑफ स्टैंप के कार्यालय के चक्कर लगाने और उसकी रिपोर्ट का इंतजार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता पहले से ही विभिन्न समस्याओं से जूझ रही है। सरकार उन्हें सुविधाएं देने में विफल रही है और अब इस प्रकार के आदेशों के माध्यम से उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनहित में इस अधिसूचना को तत्काल वापस लेना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों और भ्रष्टाचार का सामना न करना पड़े।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित