नयी दिल्ली , अप्रैल 2 -- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को सैनिक स्कूल रीवा का दौरा किया जहां उन्होंने पूर्व कैडेट के तौर पर पुरानी यादों को ताजा किया। जनरल द्विवेदी इस स्कूल में केवल थल सेना प्रमुख के रूप में नहीं, बल्कि एक पूर्व कैडेट के रूप में लौटे थे, जिन्हें इस संस्थान के अनुशासन और आदर्शों ने आकार दिया था। सेना प्रमुख की यात्रा के दौरान वे गलियारे, जो कभी उनकी प्रारंभिक आकांक्षाओं की गूंज से भरे रहते थे, अब उनकी पूर्ण हुई यात्रा के साक्षी बने, जहां गर्व और स्मृतियाँ एक साथ मिलकर हर युवा कैडेट को प्रेरित कर रही थीं। उनका यह दौरा मात्र औपचारिक नहीं था, बल्कि यह एक सशक्त स्मरण था कि इन कक्षाओं और परेड मैदानों में बोए गए नेतृत्व के बीज एक दिन राष्ट्र का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

यह यात्रा संस्थान और उसके एक विशिष्ट पूर्व छात्र के बीच स्थायी संबंध को दर्शाती है, जिनकी अनुशासन, साहस और नेतृत्व की यात्रा यहीं से शुरू हुई थी। सेना प्रमुख ने विद्यालय स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरूप पुष्पांजलि अर्पित की, कैडेटों द्वारा प्रभावशाली गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया और शिक्षकों व छात्रों के साथ संवाद किया। उन्होंने संस्थान की समृद्ध परंपराओं को बनाए रखने और युवा मनों को जिम्मेदार, सक्षम तथा राष्ट्रोन्मुखी नेताओं के रूप में विकसित करने के लिए सराहना की।

अपने प्रारंभिक वर्षों को याद करते हुए, जनरल द्विवेदी ने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए और इस बात पर प्रकाश डाला कि विद्यालय ने उनमें ईमानदारी, दृढ़ता और सेवा के मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें उत्कृष्टता प्राप्त करने, राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में अडिग रहने और नेतृत्व तथा चरित्र के सर्वोच्च आदर्शों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

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