नयी दिल्ली , मार्च 17 -- पर्यटन मंत्रालय के अधीन भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मंगलवार को जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन और आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन यहां आयोजित समारोह में किया गया।

इस पहल का उद्देश्य देशभर में जनजातीय समुदायों द्वारा संचालित होमस्टे के लिए पेशेवर आतिथ्य कौशल को मजबूत करना, सेवा मानकों को बेहतर बनाना और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाना है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पर्यटन मंत्रालय के अधीन आईटीडीसी के आईएचएम अशोक द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के पहले बैच में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गुजरात से आए 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से होमस्टे संचालकों को आतिथ्य प्रबंधन, पर्यटक सेवा, स्वच्छता, स्थानीय संस्कृति के प्रस्तुतीकरण और टिकाऊ पर्यटन से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।

समारोह में आईएचएम अशोक द्वारा तैयार प्रकाशन "ट्राइबल होमस्टे - जनजातीय आवास संचालन एवं विकास नियमावली 2026" का भी विमोचन किया गया। यह नियमावली देशभर में जनजातीय होमस्टे के विकास और पेशेवर प्रबंधन के लिए एक संरचित मार्गदर्शिका के रूप में तैयार की गयी है।

यह बहुभाषी संसाधन है और इसे हिंदी तथा गुजराती में भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि विभिन्न राज्यों के समुदायों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने कहा कि आज के पर्यटक भीड़-भाड़ से दूर, प्रकृति के करीब और प्रदूषण मुक्त स्थानों में ठहरना पसंद करते हैं। ऐसे में होमस्टे मॉडल पर्यटन क्षेत्र के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में होटल कमरों की कमी को देखते हुए होमस्टे एक मजबूत समाधान है। इससे न केवल पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का वास्तविक अनुभव मिलता है, बल्कि जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर भी पैदा होते हैं।

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