जशपुर , जुलाई 03 -- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कहा है कि आयोग अनुसूचित जनजाति समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और उनकी शिकायतों के निराकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है तथा सभी वैध मामलों का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
डॉ. लकड़ा ने शुक्रवार को जशपुर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए उनकी समस्याएं, सुझाव और शिकायतें सुनीं। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निराकरण करना ही नहीं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा कर उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना भी है। स्थानीय स्तर पर निराकरण संभव नहीं होने वाले मामलों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर कार्रवाई कराई जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सड़क, पेयजल, बिजली, विद्यालय, शिक्षक अथवा आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है या अनुसूचित जनजाति अत्याचार, शोषण अथवा जातिसूचक टिप्पणी से जुड़े मामले सामने आते हैं तो आयोग ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
डॉ. लकड़ा ने बताया कि आयोग का गठन वर्ष 2004 में संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत किया गया था। आयोग को अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त संवैधानिक और कानूनी संरक्षणों के क्रियान्वयन की निगरानी, शिकायतों की जांच तथा सरकार को आवश्यक अनुशंसाएं देने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि आयोग के पास जांच के दौरान दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियां भी हैं।
उन्होंने जनजातीय समुदाय से अपनी शिकायतें लिखित रूप में आयोग को उपलब्ध कराने की अपील करते हुए कहा कि आयोग की वेबसाइट के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को डायरी नंबर जारी किया जाता है, जिसके आधार पर प्रकरण की सुनवाई की जाती है।
बैठक में विधायक गोमती साय और रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अधिकारी तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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