भुवनेश्वर , जुलाई 09 -- ओडिशा के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआईएस) को मज़बूत करने पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला बुधवार को 'भुवनेश्वर घोषणापत्र' को अपनाने के साथ संपन्न हुई।

इस घोषणापत्र में अनुसंधान, नवाचार, सांस्कृतिक संरक्षण और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण के लिए जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों में बदलने का एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह कार्यशाला उन संस्थानों को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी, जो 'विकसित भारत एट 2047' के विज़न के अनुरूप आदिवासी ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और नीतिगत सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

इस कार्यशाला में देश भर के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों, राज्य के आदिवासी कल्याण विभागों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी संगठनों, उद्योग जगत और विकास भागीदारों के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने भारत के आदिवासी अनुसंधान इकोसिस्टम के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

पहले दिन, प्रतिभागियों ने चार विषयगत कार्य समूहों और विशेषज्ञ पैनल चर्चाओं में भाग लिया, जिनका मुख्य उद्देश्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को ज्ञान और सांस्कृतिक संसाधनों के केंद्रों में रूपांतरित करना, जनजातीय विकास के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को सुदृढ़ करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करना, और संस्थागत क्षमता, शासन और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाना था।

दूसरे दिन, विषयगत समूहों की अनुशंसाओं को प्रस्तुत किया गया, उन पर विचार-विमर्श किया गया और जनजातीय मामलों के मंत्रालय के परामर्श से उन्हें एक राष्ट्रीय रोडमैप में समेकित किया गया।

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