पौड़ी , जुलाई 21 -- उत्तराखंड में जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियों के तहत पौड़ी गढवाल जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार से सुपरवाइजरों (राजस्व उपनिरीक्षकों) के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए अधिकारियों से जनगणना कार्य को पूरी गंभीरता, जिम्मेदारी और समर्पण के साथ संपन्न करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नहीं, बल्कि देश की विकास नीतियों, कल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और भविष्य की विकास रणनीति का आधार है। इसलिए प्रत्येक सूचना का संकलन शत-प्रतिशत शुद्धता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाना आवश्यक है। उन्होंने प्रथम चरण के सफल संचालन पर अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि दूसरा चरण भी पूरी दक्षता के साथ सफल होगा।
उन्होंने बताया कि इस चरण में ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, संचार, बैंकिंग सेवाएं, विद्युत, ईंधन, भूमि उपयोग, कृषि, हस्तशिल्प समेत विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का डिजिटल माध्यम से सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए राजस्व उपनिरीक्षक मोबाइल एप के माध्यम से आंकड़े एकत्र कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे, जिससे सरकार को जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति के अनुरूप विकास योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जनगणना के महत्व के प्रति आमजन को जागरूक करने तथा प्रत्येक परिवार से सही और पूर्ण जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए। साथ ही मास्टर ट्रेनरों से प्रशिक्षण को व्यवहारिक, संवादात्मक और तकनीकी रूप से प्रभावी बनाने को कहा, ताकि फील्ड में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
अपर जिलाधिकारी एफ.आर. चौहान ने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने चार्ज अधिकारियों को क्षेत्रीय सीमाओं का सही निर्धारण सुनिश्चित करने, किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति अथवा छूट से बचने तथा अधीनस्थ प्रगणकों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखते हुए फील्ड मॉनिटरिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस पर भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय तथा जनगणना निदेशालय के विशेषज्ञों ने पौड़ी तहसील के राजस्व उपनिरीक्षकों को सर्वेक्षण प्रक्रिया, डिजिटल डेटा संकलन और पोर्टल संचालन का विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में बताया गया कि जनगणना-2027 का दूसरा चरण नौ से 28 फरवरी, 2027 तक संचालित होगा, जबकि उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में यह कार्य 11 से 30 सितंबर, 2026 के बीच किया जाएगा। इस बार पहली बार पूरी जनगणना प्रक्रिया शत-प्रतिशत डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। प्रगणक मोबाइल एप के जरिए आंकड़ों का संकलन करेंगे तथा जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल के माध्यम से पूरे अभियान की निगरानी की जाएगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित