नयी दिल्ली , अगस्त 17 -- कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देश में शुरु हुई जनगणना में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम नहीं रखा गया है और 14 अगस्त को जारी प्रश्नावली में ओबीसी की जगह केवल 'कास्ट' लिखा गया है।
कांग्रेस के ओबीसी विभाग के चेयरमैन डॉ.अनिल जय हिंद ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ओबीसी को जनगणना में अलग स्थान नहीं देना गंभीर सवाल खड़े करता है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने संविधान संशोधन के जरिए ओबीसी के साथ एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण दिया था जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ओबीसी को जनगणना से गायब कर दिया है।
डॉ.जय हिंद ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी 2023 से लगातार जातिगत जनगणना की मांग उठाते रहे हैं और अंततः 30 अप्रैल 2025 को श्री मोदी को इसकी घोषणा करनी पड़ी। श्री गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महसूस किया था कि देश के सत्ता ढांचे में गांवों में रहने वाले लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है इसलिए उन्होंने 29 जुलाई 2024 को लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने के बाद कहा था कि चाहे उनके खिलाफ कुछ भी कहा जाए, वह देश में जातिगत जनगणना कराकर रहेंगे। डॉ. जय हिंद ने आरोप लगाया कि घोषणा के बावजूद सरकार इसे पूरी पारदर्शिता के साथ कराने से बच रही है।
तेलंगाना में हुए जाति सर्वे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक और जातिगत पहलुओं को शामिल करते हुए 54 सवालों की प्रश्नावली तैयार की गई थी। गणनाकर्मी 242 जातियों की जाति पुस्तिका और केंद्रीय जाति सूची लेकर घर-घर गए।
उन्होंने कहा कि रोहिणी आयोग ने भी पिछड़े वर्गों को न्याय देने के लिए भूमिहीन ओबीसी की सही संख्या पता करना जरूरी बताया था, लेकिन उसकी सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। डॉ. जयहिंद ने कहा कि सरकार चाहे कुछ भी कर ले सही जातिगत जनगणना को रोका नहीं जा सकता और देश में सच्ची जातिगत जनगणना होकर रहेगी।
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