बैतूल , नवम्बर 02 -- मध्यप्रदेश के बैतूल में जज की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली प्रखरश्री दीदी ने नौकरी ज्वाइन करने से पहले सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है। उनके साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनें भी आगामी 22 नवंबर को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी। दीक्षा से पहले रविवार को पांचों दीक्षार्थी बहनों की भव्य बिनौली निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित शोभायात्रा में विंटेज कारों का काफिला, आकर्षक शाही बग्गियां और राजस्थान के उदयपुर से बुलाया गया विशेष बैंड आकर्षण का केंद्र रहे। शहर के प्रमुख मार्गों से निकली बिनौली का जगह-जगह पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ स्वागत किया गया। शोभायात्रा में दूर-दराज से आए श्रद्धालु भी शामिल हुए।
प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा उत्तीर्ण करें। उन्होंने मेहनत से परीक्षा पास कर माता-पिता का सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य की भावना थी। उनका कहना है कि भगवान महावीर के बताए अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलकर वह मानवता की सेवा करना चाहती हैं। इसी भावना से उन्होंने जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है।
शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जैन दादावाड़ी पहुंची, जहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की पारंपरिक गोदभराई की रस्म संपन्न हुई। दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने कहा कि यह उनके सांसारिक जीवन की अंतिम विदाई का अवसर है। वर्तमान में वे रंगीन वस्त्र धारण कर रही हैं, जबकि दीक्षा के बाद सफेद वस्त्र पहनकर संयम का जीवन अपनाएंगी।
आयोजकों के अनुसार, प्रखरश्री दीदी सहित पांचों बहनें 22 नवंबर को विधिवत जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी। आयोजन में सकल जैन समाज और स्थानीय नागरिकों का सहयोग रहा। समाज के वरिष्ठजनों ने समारोह में शामिल हुए अतिथियों और विभिन्न स्थानों से पहुंचे श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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