नयी दिल्ली , अगस्त 25 -- दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसी कथित पुलिस बर्बरता की जांच के लिए गठित 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति के पुनर्गठन की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष मंगलवार को दायर इस याचिका का उल्लेख करते हुए इसे अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए इसे "अत्यंत शरारतपूर्ण" बताया और इसके राजनीतिक रूप से प्रेरित होने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का इस्तेमाल "राजनीतिक मंच" के रूप में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने समिति के प्रस्तावित पुनर्गठन के संबंध में नामों के सुझाव दिए जाने पर भी आपत्ति जताई। इस पहलू पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "हम इस तरह से नामों का उल्लेख किए जाने को सराहा नहीं करते।"याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि वे न तो मौजूदा समिति के किसी सदस्य का नाम ले रहे हैं और न ही पुनर्गठन की मांग करते समय कोई नया नाम प्रस्तावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर उनका सीमित अनुरोध केवल इतना है कि आवेदन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित