चंडीगढ़/नयी दिल्ली , जुलाई 21 -- शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की वरिष्ठ नेता एवं बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्र सरकार से छात्रों और किसानों की शिकायतों का समाधान बातचीत के माध्यम से करने की अपील करते हुए मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र में उनकी आवाज को बल प्रयोग से दबाने का प्रयास उचित नहीं है।
सुश्री बादल ने आज नयी दिल्ली में संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। नीट परीक्षा पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में खामियां और जेईई मेन्स परीक्षा के दौरान तकनीकी समस्याएं गंभीर मुद्दे हैं, जिनका समाधान किया जाना चाहिए। अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा पर जीवनभर की कमाई खर्च करते हैं और यदि परीक्षा प्रणाली ही भरोसेमंद नहीं रहेगी तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि छात्र किसी हिंसक इरादे से नहीं आये थे, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार और नीट पेपर लीक से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को छात्रों की पीड़ा के प्रति संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए और उनके साथ सार्थक संवाद कर उनकी सभी शिकायतों का समाधान करना चाहिए। उन्होंने हरियाणा सीमा पर किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए लगाये गये बैरिकेड्स की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों को भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक अधिकार है।
सुश्री बादल ने कहा कि उन्होंने पिछले दो संसदीय सत्रों में भी इस मुद्दे को संसद में उठाया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस प्रस्तावित व्यापार समझौते का पूरा विवरण संसद या देश की जनता के सामने नहीं रखा है। उन्होंने कहा कि समझौते के बारे में अधिक जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस की ओर से सामने आयी। उन्होंने कहा कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को आशंका है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद सस्ते कृषि एवं डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ सकता है। उनका कहना था कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, ऐसे में भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं, जिसका असर देश की कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
शिअद नेता ने कहा कि किसान आंदोलन से देश ने यह सबक सीखा है कि बैरिकेड लगाकर किसानों को सीमाओं पर रोकना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के साथ तत्काल संवाद शुरू कर उनकी सभी आशंकाओं और शिकायतों का समाधान करने की अपील की।
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