बहराइच , सितम्बर 15 -- उत्तर प्रदेश में बहराइच में छात्र-छात्राओं, विशेषकर बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने स्कूली वाहनों के संचालन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय के आदेश के बाद अब छात्राओं को लेकर चलने वाले स्कूल वाहनों में चालक के अतिरिक्त महिला परिचारिका (अटेंडेंट) के साथ एक अध्यापक की मौजूदगी भी सुनिश्चित करनी होगी। उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने जनहित याचिका संख्या 3436/2020 में गत सात सितम्बर को स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निर्देश पारित किए। न्यायालय ने स्कूलों के स्वामित्व वाले अथवा विद्यालयों से अनुबंधित वाहनों से आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय के निर्देश के अनुसार स्कूली वाहन में चालक के अतिरिक्त एक परिचारक (अटेंडेंट) की मौजूदगी अनिवार्य होगी। यदि वाहन में बालिका विद्यार्थी यात्रा कर रही हैं तो अटेंडेंट अनिवार्य रूप से महिला होना चाहिए। इसके साथ ही ऐसे वाहन में एक अध्यापक की मौजूदगी भी सुनिश्चित करनी होगी।

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन/प्रवर्तन) सुनील कुमार ने जनपद के सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन को न्यायालय के आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन कार्रवाई के दौरान यदि स्कूली वाहनों में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली तो इसे उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-2019 के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा।

ऐसे मामलों में परिवहन विभाग द्वारा प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए वाहन का चालान करने के साथ आवश्यकतानुसार उसे बंद करने की कार्रवाई भी की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन एवं प्रधानाचार्य की होगी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिवहन विभाग ने विद्यालयों को विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने और उसे प्रभावी रूप से क्रियाशील रखने का भी सुझाव दिया है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना विद्यालय प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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