नैनीताल , मई 30 -- कोविड-19 महामारी के कारण बंद पड़ा भारत-चीन सीमा व्यापार अब छह साल बाद फिर शुरू होने जा रहा है। विदेश मंत्रालय की ओर से व्यापार पास जारी किए जाने के बाद लिपुलेख दर्रे से सीमा व्यापार जून के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है।
जिला मजिस्ट्रेट आशीष भटगई ने शनिवार को बताया कि भारत सरकार से 300 से अधिक व्यापार पास प्राप्त हो चुके हैं। ये पास जल्द ही व्यापारियों और उनके सहायकों को जारी किए जाएंगे। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले सप्ताह से व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी। लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार का इतिहास सदियों पुराना रहा है। बताया जाता है कि व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के भोटिया समुदाय के व्यापारी इस मार्ग से तिब्बत के साथ व्यापार करते थे। उस दौर में कुमाऊं और गढ़वाल की निचली घाटियों से उत्पादित अनाज के बदले तिब्बती नमक, ऊन और अन्य वस्तुओं का आयात किया जाता था।
जानकारों का कहना है कि 1962 के भारत-चीन युद्ध का असर भारत-चीन व्यापार पर पड़ा और फलस्वरूप यह बंद हो गया। वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच सहमति बनने पर इसे फिर शुरू किया गया लेकिन कोरोना महामारी के दौरान 2019 में एक बार फिर व्यापार ठप हो गया। सीमा व्यापार फिर शुरू होने से सीमांत व्यापारियों में उत्साह का माहौल है। जिला प्रशासन के साथ हुई पहली बैठक से व्यापारी पूरी तरह से तैयारियों में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि कई व्यापारियों ने चीन ले जाने वाले सामान को गुंजी स्थित गोदामों में पहुंचा दिया है।
जानकारों का मानना है कि छह साल बाद सीमा व्यापार शुरू होने से सीमांत क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, स्थानीय व्यापारियों को नए अवसर मिलेंगे और पारंपरिक व्यापारिक विरासत को भी नया जीवन मिलेगा। साथ ही, व्यास, दारमा और चौदास घाटियों के लोगों की आजीविका के नई उम्मीद जगी है।
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