धार , जुलाई 20 -- मध्यप्रदेश के धार जिले में नगर और तिरला क्षेत्र की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्वीकृत बदनावर उद्वहन सिंचाई परियोजना छह वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। वर्ष 2020 में प्रारंभ हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का अब तक केवल 65 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा क्षेत्रीय विधायक नीना विक्रम वर्मा ने विधानसभा में उठाया, जिसके जवाब में विभाग ने परियोजना की प्रगति और विलंब के कारणों की जानकारी दी है।

विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार परियोजना को सात अगस्त 2018 को स्वीकृति मिली थी तथा 17 फरवरी 2020 से निर्माण कार्य शुरू हुआ। अनुबंध के अनुसार 48 माह में यानी 16 फरवरी 2024 तक परियोजना पूरी हो जानी थी, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी निर्माण पूरा नहीं हो सका। इसके चलते विभाग को ठेकेदार को दो बार समयावधि विस्तार देना पड़ा।

विभाग के अनुसार पहली बार 17 फरवरी 2024 से 30 जून 2024 तक चार माह का विस्तार दिया गया। इसके बाद भी कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर दूसरी बार एक जुलाई 2024 से 30 जून 2026 तक 24 माह की अतिरिक्त अवधि स्वीकृत की गई। इसके बावजूद परियोजना की भौतिक प्रगति अभी केवल 65 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी है।

जानकारी के अनुसार वितरण पाइपलाइन का कार्य कुछ क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है, लेकिन परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से मुख्य पाइपलाइन और पंप हाउस का निर्माण काफी पीछे है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि विभाग केवल पत्राचार तक सीमित है और ठेकेदार के विरुद्ध प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है।

परियोजना में विलंब के कारण बढ़ती लागत के संबंध में शासन ने विधानसभा में बताया कि टर्न-की पद्धति के तहत मूल्य वृद्धि का भार नियमानुसार शासन वहन करता है। हालांकि ठेकेदार की देरी के कारण अतिरिक्त वित्तीय भार से बचने के लिए द्वितीय समयावधि विस्तार के दौरान मूल्य सूचकांक को फरवरी 2024 की स्थिति पर फ्रीज कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि सामग्री की कीमतों में परिवर्तन से परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी तथा सतत मॉनिटरिंग और तकनीकी जांच के माध्यम से कार्य शीघ्र पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।

परियोजना से धार नगर की पेयजल आपूर्ति के लिए नौ एमसीएम जल आरक्षित किया गया है। नगर पालिका धार द्वारा अमृत-2 योजना के तहत मुख्य इंटकवेल से शहर तक पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव भी इसी परियोजना पर आधारित है। मुख्य परियोजना में हो रही देरी के कारण धार शहर और तिरला क्षेत्र के हजारों लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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