नयी दिल्ली , अक्टूबर 17 -- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने छह माह तक की आयु के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इसके लिए प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का मसौदा अधिसूचित किया है। इस पहल का उद्देश्य शिशुओं के पोषण संबंधी मानकों को मजबूत करना और जीवन के शुरुआती महीनों में अतिरिक्त शर्करा के सेवन से बचाव करना है।

उन्होंने कहा कि भारतीय राजपत्र में 16 अक्टूबर को प्रकाशित संशोधन के मसौदे के तहत छह माह तक के शिशुओं के लिए निर्धारित उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर विशेष प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। मौजूदा नियमों में जन्म से लेकर 24 माह तक के बच्चों के लिए विभिन्न शिशु पोषण उत्पादों की पोषण संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी मानक निर्धारित हैं। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर कार्बोहाइड्रेट के पसंदीदा स्रोत हैं, जबकि सुक्रोज और फ्रक्टोज को निर्धारित सीमाओं के अधीन विशेष परिस्थितियों में मिलाने की अनुमति है।

एफएसएसएआई के अनुसार, जीवन के पहले छह माह शिशुओं की स्वस्थ वृद्धि और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य इस आयु वर्ग की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते समय अतिरिक्त शर्करा के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकना है। यह कदम बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के व्यापक जनस्वास्थ्य प्रयासों के अनुरूप भी है। साथ ही, यह जीवन के पहले छह माह तक केवल स्तनपान को प्रोत्साहित करने संबंधी स्थापित जनस्वास्थ्य सिफारिशों के अनुरूप है।

संशोधन का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है। एफएसएसएआई ने हितधारकों से राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराए जाने की तारीख से 60 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किये हैं।

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