नैनीताल , मई 11 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुड़की स्थित बीएसएम पीजी कॉलेज के प्रबंधन और संस्था की संपत्तियों से जुड़े विवादों को लेकर दायर जनहित याचिका को छद्म मुक़दमेबाज़ी बताते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ में हुई। अदालत ने सात को पारित आदेश में स्पष्ट कहा कि जनहित याचिका का उपयोग निजी अथवा गुटीय विवादों के निस्तारण के लिए नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता अनीता शर्मा ने स्वयं को बीएसएम (पीजी) कॉलेज रुड़की की सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर बताते हुए कॉलेज का संचालन करने वाली सोसायटी में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सार्वजनिक धन के गबन तथा संस्था की संपत्तियों के अवैध हस्तांतरण की जांच कराने की मांग की थी। साथ ही कॉलेज में अधिकृत नियंत्रक नियुक्त करने के निर्देश देने की भी प्रार्थना की गई थी।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि याचिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विवाद मूल रूप से सोसायटी और उससे संचालित शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन एवं नियंत्रण से संबंधित आंतरिक विवाद है।
अदालत ने कहा कि याचिका की भाषा और तथ्यों से स्पष्ट है कि यह वास्तविक जनहित याचिका नहीं बल्कि छद्म मुक़दमेबाज़ी है। न्यायालय ने कहा कि स्वयं याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया है कि विभिन्न व्यक्तियों की ओर से अलग-अलग वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष आपत्तियां और मामले लंबित हैं। ऐसे में गुटीय विवादों को जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जनहित याचिका की व्यवस्था का उपयोग वास्तविक जनहित और उन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जाना चाहिए जो स्वयं न्यायालय तक नहीं पहुंच सकते। संवैधानिक न्यायालय लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि पीआईएल का इस्तेमाल व्यक्तिगत हित साधने या निजी विवादों के समाधान के लिए नहीं किया जा सकता।
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