रायपुर , मार्च 15 -- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के कारण बस्तर क्षेत्र में शांति और खुशहाली बहाल करने की दिशा में सरकार को सफलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सल प्रभाव और विकास से दूरी के कारण पिछड़ा रहा, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में आयोजित दो दिवसीय 'आदि परब' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे जिसका समापन शनिवार रात हर्षोल्लास के साथ हुआ।
उन्होंने कहा कि 'आदि परब' की थीम 'परंपरा से पहचान तक' रखी गई है। इस आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच प्रदान करना है। इसमें छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भी भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 43 जनजातियों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए, जो राज्य की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए विभाग की टीम को बधाई दी और 'आदि परब' चित्रकला व परिधान को 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' पुरस्कार मिलने पर शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि इससे जनजातीय युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजनों का विशेष महत्व है। यहां पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अनूठा संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं।
उन्होंने बताया कि परिसर में स्थापित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि एक नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल 'शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय' का लोकार्पण किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कार सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देश में आदिवासी समाज के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। राष्ट्रपति पद पर आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मु का पहुंचना पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' के तहत राज्य में चिन्हित 6,691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। वहीं पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके तहत प्रदेश की 2,300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 'नियद नेल्लानार योजना' के जरिए नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
कार्यक्रम में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने 'परंपरा से पहचान तक' थीम पर आयोजित 'आदि परब' के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
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