रायपुर , मार्च 11 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने गंभीर सवाल उठाए। मुद्दा यह थानकि प्रदेश में कई पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड नहीं मिल पा रहा है और कई बड़े निजी अस्पतालों में भी योजना का लाभ सही तरीके से नहीं दिया जा रहा है।
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान विपक्ष की विधायक कविता प्राण लहरे ने कहा कि कई निजी अस्पतालों में मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज देने से बचा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि योजना में गंभीर बीमारियों के उपचार को लेकर भी मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। विधायकों ने सरकार से स्पष्ट घोषणा कर यह सुनिश्चित करने की मांग की कि कार्डधारकों को सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार का पूरा लाभ मिले।
विधानसभा की आसंदी ने भी मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य मंत्री से जल्द ठोस निर्णय लेने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा कि इस विषय में सीधे घोषणा करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाओं का पालन करना होता है। मंत्री के इस जवाब पर विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि निजी अस्पतालों के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता, तो उससे जुड़े नियमों को सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।
इस दौरान अन्य विधायकों ने भी योजना के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाया। विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में आयुष्मान योजना को लेकर उन्होंने कई बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई। वहीं आशाराम नेताम ने भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अंत में आसंदी ने कहा कि पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य योजना के बेहतर संचालन को लेकर चिंतित हैं और सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित