रायपुर , जुलाई 07 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से स्पीकर हाउस पहुंचकर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। बाद में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने भी विधानसभा अध्यक्ष से भेंट कर आगामी सत्र को लेकर चर्चा की। इन बैठकों को मानसून सत्र की रणनीति और सदन के सुचारु संचालन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के बीच आगामी सत्र की तैयारियों, सदन की कार्यवाही तथा विभिन्न संसदीय विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री स्पीकर हाउस से सीधे मंत्रालय के लिए रवाना हो गए। वहीं नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत भी विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद वहां से रवाना हुए।

आगामी 13 जुलाई से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय मानसून सत्र के लिए अब तक विधायकों की ओर से 1,033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।

कांग्रेस ने सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़क निर्माण तथा मानसून के दौरान व्यवस्थाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। विपक्ष का कहना है कि इन विषयों पर सरकार से जवाबदेही तय कराई जाएगी और सदन में व्यापक चर्चा कराई जाएगी।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, नशे का कारोबार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था गंभीर चिंता के विषय हैं। विपक्ष इन मामलों में सरकार से जवाब मांगने के साथ प्रभावी कार्रवाई की मांग भी करेगा।

कृषि क्षेत्र से जुड़े विषय भी मानसून सत्र के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। कांग्रेस खरीफ सीजन में खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियों तथा कृषि क्षेत्र से संबंधित अन्य समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। विपक्ष का आरोप है कि किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।

रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विस्थापन तथा विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि से जुड़ा विवाद भी सत्र के दौरान प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। कांग्रेस इसे सरकार की कार्यशैली और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाने का महत्वपूर्ण विषय बनाएगी। इस मामले में भाजपा के एक सांसद की ओर से भी सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल पहले ही गरमा चुका है।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट, बदहाल सड़कें, स्कूलों से जुड़े विवाद, मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर भी विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में है। हालिया बारिश के बीच राहत और बचाव कार्यों की स्थिति पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने भी विपक्ष के संभावित सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने और अपनी उपलब्धियों को सदन के पटल पर रखने की तैयारी पूरी कर ली है। ऐसे में 13 जुलाई से शुरू होने वाला विधानसभा का मानसून सत्र प्रदेश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक मंच बनने की संभावना है।

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