रायपुर , अक्टूबर 31 -- छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस वर्ष वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी के माध्यम से बस्तर में पर्यटन के विस्तार, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया जायेगा।
विभाग की ओर से 'बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़' थीम पर तैयार की जा रही प्रदर्शनी में महिला सशक्तिकरण, युवाओं की आजीविका और वन आधारित अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्योत्सव की थीम 'सशक्त नारी, युवा उड़ान' के अनुरूप प्रदर्शनी में बस्तर के उन इलाकों में विकसित हो रही पर्यटन गतिविधियों को प्रमुखता दी जायेगी, जहां नक्सली गतिविधियों के कारण लंबे समय तक पर्यटन की संभावनाएं सीमित रही थीं। अब इन क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पर्यटन और स्वरोजगार के नये अवसर विकसित किये जा रहे हैं।
प्रदर्शनी में कांगेर घाटी की जंगल सफारी और गुफाओं, कोण्डागांव की पुष्पाल घाटी में स्टार गेजिंग, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका तथा सुकमा के तुंगल डैम को आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया जायेगा। इसके अतिरिक्त धुड़मारास के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के जरिए बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन आधारित आजीविका को दर्शाया जायेगा।
महिला आत्मनिर्भरता के उदाहरण के रूप में सुकमा के तुंगल कैफे को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं संयुक्त रूप से इस कैफे का संचालन कर रही हैं। वहीं, कांगेर घाटी में चक्रीय निधि के माध्यम से उपलब्ध कराये गये 35 जिप्सी वाहनों से लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। तुंगल क्षेत्र में नौका विहार, कयाकिंग और नेचर गाइड जैसी गतिविधियां भी युवाओं की आय का माध्यम बन रही हैं।
वन्यजीव संरक्षण से संबंधित उपलब्धियों और प्रयासों को भी प्रदर्शनी में शामिल किया जाएगा। बारनवापारा अभयारण्य में दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण तथा प्रदेश के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण की जानकारी दी जायेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में बारनवापारा में काले हिरण की वापसी का उल्लेख किया था।
इसके साथ ही धमतरी के ठेमली द्वीप को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा। 'गजरथ यात्रा' के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व के प्रबंधन और सह-अस्तित्व का संदेश दिया जायेगा। प्रदर्शनी में प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना तथा राजकीय तितली के रूप में अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करायी जायेगी।
वनांचल में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़े प्रयासों को भी प्रदर्शित किया जायेगा। इसके अंतर्गत लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाइयों, 'छत्तीसगढ़ हर्बल्स' और छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की गतिविधियों की जानकारी दी जायेगी। आगंतुक वन उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के साथ उनकी खरीदारी भी कर सकेंगे।
राज्योत्सव में आने वाले बच्चों और युवाओं के लिए वन, वन्यजीव तथा बस्तर से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जायेंगी। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे। प्रदर्शनी स्थल पर उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से पर्यटक प्रदेश के इको-पर्यटन स्थलों, आवागमन के मार्गों, सुविधाओं और बुकिंग संबंधी जानकारी मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे।
पंकज अशोकवार्तावन विभाग का प्रदर्शनी मंडप लगभग 88 गुणा 30 फीट क्षेत्र में तैयार किया जाएगा। इसमें तीन विशेष प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जिनमें दंतेवाड़ा के वन मंदिर, जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका और बस्तर के प्रसिद्ध 'टाइगर बॉय' चेंदरू की स्मृति में निर्मित चेंदरू द्वार शामिल होंगे। मंडप में एलईडी स्क्रीन के जरिए बस्तर में आए बदलाव और विकास गतिविधियों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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