रायपुर , अगस्त 09 -- छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के करीब 700 प्रशासनिक तबादलों को लेकर नवीन शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संघ ने रविवार को कहा कि पिछले शिक्षा सत्र में शिक्षकों की कमी के आधार पर बड़े पैमाने पर किए गए युक्तियुक्तकरण के बाद बीच शिक्षा सत्र में इतने बड़े पैमाने पर तबादलों की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसका शासन को स्पष्टीकरण देना चाहिए।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि पिछले सत्र में शिक्षकों की आवश्यकता और उपलब्धता का आकलन कर युक्तियुक्तकरण किया गया था। ऐसे में अब बीच सत्र में करीब 700 शिक्षकों के प्रशासनिक तबादले किए जाने से शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

राजपूत ने तबादला प्रक्रिया में स्कूलवार रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक का प्रशासनिक स्थानांतरण करने से पहले संबंधित जिले और विद्यालयों में वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी जुटाना आवश्यक है। यदि अधिकांश शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी के विकल्प पर तबादला दिया गया है, तो शिक्षकों को विकल्प देने से पहले स्कूलवार रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई।

उन्होंने सवाल किया, "यदि रिक्त पदों की जानकारी थी तो शिक्षकों के सामने सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि रिक्त पदों की जानकारी नहीं थी, तो बिना रिक्त पदों का आकलन किए तबादले कैसे किए गए?"नवीन शिक्षक संघ का कहना है कि पिछले शिक्षा सत्र में युक्तियुक्तकरण के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों से हटाकर दूसरे विद्यालयों में पदस्थ किया गया था। संघ के अनुसार, कई शिक्षक अभी भी युक्तियुक्तकरण से उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में बीच शिक्षा सत्र में फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादले किए जाने से शिक्षकों के समक्ष नई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

संघ ने प्रदेश में शिक्षकों के लिए खुली और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षकों को जिले एवं विद्यालयवार रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए और इसके बाद शिक्षकों से विकल्प लेकर पारदर्शी तरीके से स्थानांतरण किया जाना चाहिए।

संघ ने शासन के समक्ष छह प्रमुख सवाल भी रखे हैं। इनमें पिछले सत्र में शिक्षकों की कमी बताकर युक्तियुक्तकरण किए जाने के बावजूद अब बीच सत्र में करीब 700 तबादले किए जाने, तबादले से पहले स्कूलवार वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी नहीं जुटाए जाने, शिक्षकों को विकल्प देने से पहले रिक्त पदों की सूची सार्वजनिक नहीं किए जाने और युक्तियुक्तकरण से प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किए बिना दोबारा तबादले किए जाने पर सवाल शामिल हैं।

इसके अलावा संघ ने पूछा है कि बीच सत्र में इतने बड़े पैमाने पर तबादलों से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और शिक्षकों के लिए खुली एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने में आखिर परेशानी क्या है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित