रायपुर , सितंबर 16 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य-पोषित योजनाओं की राशि के पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन के लिए स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (एस-एसएनए) मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए अलग-अलग क्रियान्वयन एजेंसियों के अनेक बैंक खातों के बजाय एक केंद्रीकृत एस-एसएनए मदर अकाउंट होगा। योजना की राशि आवश्यकता के समय ही जारी की जाएगी और जीरो बैलेंस सब्सिडियरी अकाउंट (जेडबीएसए) के माध्यम से सीधे हितग्राही अथवा वेंडर के खाते में भुगतान किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, जस्ट-इन-टाइम फंड रिलीज व्यवस्था से विभिन्न बैंक खातों में सरकारी राशि के लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहने की समस्या कम होगी। इसके साथ ही योजनाओं के फंड फ्लो और व्यय की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एस-एसएनए मॉडल से सरकारी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि नई व्यवस्था राज्य के वित्तीय प्रबंधन को तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाएगी। इससे नकदी प्रबंधन बेहतर होने के साथ अनावश्यक ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज भार को कम करने में भी मदद मिलेगी।
वर्तमान व्यवस्था में आवश्यकता से पहले राशि आहरित होने के कारण विभिन्न विभागीय खातों में बड़ी मात्रा में सरकारी धन निष्क्रिय पड़ा रहता है। सरकार के मुताबिक विभागीय निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ रुपये तथा भारतीय रिजर्व बैंक के डीईएएफ खातों में करीब 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी स्थितियों को नई व्यवस्था के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकेगा।
एस-एसएनए मॉडल में डिजिटल ऑडिट ट्रेल और मेकर-चेकर व्यवस्था होगी। इससे उपलब्ध निधि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक खर्च और अप्रयुक्त राशि की जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का कहना है कि इससे अनधिकृत भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर नियंत्रण मजबूत होगा।
इस व्यवस्था के तहत योजनाओं की राशि के प्रबंधन से अर्जित ब्याज राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा। डीबीटी और नॉन-डीबीटी दोनों प्रकार के भुगतान तथा जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिन्हित क्रियान्वयन एजेंसियों को इसके दायरे में लाया जा सकेगा।
एस-एसएनए मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें योजना की पहचान, वित्त विभाग की मंजूरी, स्कीम कोड आवंटन, ई-कोष मैपिंग, एस-एसएनए एवं जेडबीएसए खाते खोलने और हितग्राही अथवा वेंडर को भुगतान की प्रक्रिया शामिल होगी।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू सिंगल नोडल एजेंसी व्यवस्था की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं में यह मॉडल लागू होगा। पीएफएमएस-एसएनए/स्पर्श के अंतर्गत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, सेंट्रल सेक्टर योजनाएं और डीडीओ द्वारा सीधे ई-कोष से भुगतान वाली योजनाएं इसके दायरे से बाहर रहेंगी।
मंत्रिपरिषद ने मॉडल के क्रियान्वयन से संबंधित आवश्यक कार्रवाई के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया है।
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