रायपुर , जून 29 -- छत्तीसगढ़ के लगभग 66 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल के विलंब भुगतान पर राहत मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत अब नियत तिथि के बाद बिल जमा करने पर पूरे महीने का लेट पेमेंट सरचार्ज नहीं लगेगा, बल्कि जितने दिन भुगतान में देरी होगी, केवल उतने ही दिनों के लिए अधिभार की गणना की जाएगी।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी ने सोमवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया तथा कुछ माध्यमों में प्रसारित 'दोहरा झटका' अथवा 'रोजाना ब्याज' संबंधी दावे भ्रामक हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि उन्हें पहले की तुलना में राहत मिलेगी।

कंपनी के अनुसार, राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा लागू नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना तथा लेट पेमेंट अधिभार की गणना को अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाना है। अब अधिभार केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगाया जाएगा।

पावर कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि पूर्व व्यवस्था में यदि कोई उपभोक्ता नियत तिथि के बाद एक-दो दिन की देरी से भी बिजली बिल जमा करता था, तो उससे पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत लेट पेमेंट सरचार्ज वसूला जाता था। इससे कम अवधि की देरी पर भी उपभोक्ताओं को पूरे महीने का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता था।

नई व्यवस्था के तहत विलंब भुगतान पर अधिभार की दर 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन निर्धारित की गई है। अर्थात जितने दिन भुगतान में देरी होगी, उसी अवधि के अनुसार अधिभार लगाया जाएगा। यदि बिल एक दिन की देरी से जमा किया जाता है तो केवल 0.04 प्रतिशत अधिभार देय होगा, जबकि 30 दिन की देरी होने पर कुल 1.2 प्रतिशत (0.04% गुणा 30 दिन) अधिभार लगेगा, जो पहले लागू 1.5 प्रतिशत मासिक सरचार्ज से कम है।

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