रायपुर , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से फसल विविधीकरण एवं व्यापवर्तन पर नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। परियोजना को क्लस्टर आधारित और चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है।
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसेट) के वैज्ञानिकों की उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कृषि वैज्ञानिकों से किसानों के खेतों का भ्रमण कर उन्हें बेहतर किस्म और अधिक मूल्य देने वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि यह परियोजना ओडिशा में पहले से संचालित की जा रही है और अब इसे छत्तीसगढ़ में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है। परियोजना का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसल प्रणाली विकसित करना, पुनरुत्थान कृषि को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। बेहतर परिणामों के लिए परियोजना को पांच वर्ष की अवधि के लिए प्रस्तावित किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार आगामी फसल मौसम से प्रयोग शुरू करने के लिए विस्तृत बेसलाइन सर्वे कराया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इक्रीसेट के बीच एक जेनेरिक समझौता किया जाएगा। समझौते को तैयार करने में समेति का भी सहयोग लिया जाएगा।
परियोजना के तहत मैदानी अमले का क्षमता विकास करने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों की उपज और उत्पादों की बिक्री के लिए सुदृढ़ मार्केट लिंकेज प्रणाली विकसित करने की भी योजना है। इसके साथ ही शासन की विभिन्न कृषि एवं विकास योजनाओं के घटकों और गतिविधियों का अभिसरण किया जाएगा।
बैठक में इक्रीसेट के वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गाैनकर ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इस दौरान इक्रीसेट के डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी और डॉ. सी.एल. जैन तथा राज्य कृषि विभाग के संचालक (समेति) बी.के. बिजरोनिया और उप संचालक कृषि उमेश सिंह तोमर मौजूद रहे।
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